NCERT ने क्लास 9 के लिए मध्यकालीन इतिहास की किताब में बदलाव किया, नई किताब में क्या क्या लिखा गया सब जानिए

NCERT book: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 9वीं की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में भारत में युद्ध और धार्मिक परंपराओं के संबंध का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कई राजाओं और राजकुमारों ने संघर्ष के समय देवी के विभिन्न रूपों को अपना रक्षक माना

अपडेटेड Sep 30, 2026 पर 9:35 AM
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NCERT book: एनसीईआरटी ने क्लास 9 के लिए मध्यकालीन इतिहास की किताब में बदलाव किया गया है

NCERT Book Row: राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की क्लास 9 की नई सोशल साइंस की किताब में कहा गया है कि भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। इसमें आगे कहा गया है कि सातवीं सदी से ही कई राजाओं और राजकुमारों ने लड़ाई के समय काली, दुर्गा, भवानी और शक्ति के दूसरे रूपों को रक्षक के तौर पर याद किया है। 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 2' नाम की यह किताब नए एकेडमिक सेशन के शुरू होने के छह महीने बाद मंगलवार (30 सितंबर) को जारी की गई। इस किताब का पहला हिस्सा जून में जारी किया गया था।

'रसिस्टेंस एंड रीजिलियन्स’ (प्रतिरोध और मजबूती) नाम के चैप्टर में सातवीं सदी से भारतीय उपमहाद्वीप पर हुए लगातार हमलों का जिक्र है। साथ ही युद्ध में धार्मिक परंपराओं के बारे में भी बताया गया है। किताब में लिखा है, "भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। काली, दुर्गा और भवानी जैसी देवियों की पूजा को एक पुरानी प्रथा बताया गया है, जिसमें शासक लड़ाई के समय शक्ति के रूपों को रक्षक के तौर पर याद करते थे।"

किताब में लिखा है, "भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। काली, दुर्गा और भवानी जैसी देवियों की पूजा को एक पुरानी प्रथा बताया गया है, जिसमें शासक लड़ाई के समय शक्ति के रूपों को रक्षक के तौर पर याद करते थे।"


इसमें कहा गया है, "माना जाता है कि बस्तर के शासक अन्नमराजा को उनकी तलवार माणिक्यदेवी (दंतेश्वरी) से मिली थी। जबकि विजयनगर के कुमार कंपन ने मदुरै में सल्तनत की सेनाओं के खिलाफ देवी से मिली तलवार का इस्तेमाल किया था। इसी तरह, पारंपरिक रूप से यह भी माना जाता है कि शिवाजी को देवी तुलजा भवानी से तलवार मिली थी।"

भारतीय शासकों के बारे में क्या कहा गया?

इस अध्याय में बताया गया है कि भारतीय उपमहाद्वीप ने सातवीं सदी के बाद से क्षेत्रीय विस्तार और धार्मिक उद्देश्य से प्रेरित हमलों का लगातार सामना किया। इसमें यह भी बताया गया है कि भारतीय शासकों और समुदायों ने अरब, तुर्की, मुगल और यूरोपीय सेनाओं का विरोध कैसे और कब किया।

एनसीईआरटी प्रमुख दिनेश सकलानी के अनुसार, "इस (सेकेंडरी) स्तर पर सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई से विश्लेषणात्मक और तार्किक क्षमता विकसित होने, आलोचनात्मक पड़ताल को बढ़ावा मिलने, अलग-अलग संस्कृतियों की समझ बढ़ने और सीखने वालों को नागरिक व सामाजिक जीवन में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ भाग लेने में सक्षम बनाने की उम्मीद की जाती है।"

उन्होंने कहा, "इसी भावना के साथ माध्यमिक स्तर के लिए किताब 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 2' की रूपरेखा तैयार की गई और इसे विकसित किया गया है।"

अल्प ज्ञात महिला शासकों का उल्लेख

एनसीईआरटी की ओर से तैयार की गई कक्षा-9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में चालुक्य वंश की रानी नायकी देवी से लेकर उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा तक भारत की अल्प ज्ञात महिला शासकों के बारे में जानकारी दी गई है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह महीने बाद मंगलवार को 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' नामक यह किताब जारी की गई। किताब का पहला भाग इस साल जून में जारी किया गया था।

रानी नायकी देवी को 1178 में माउंट आबू के पास कसरहड़ा में मोहम्मद गोरी को हराने का श्रेय दिया जाता है। सातवीं शताब्दी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप पर हुए एक के बाद एक आक्रमणों का विवरण देने वाले अध्याय प्रतिरोध और दृढ़ता में तुर्क आक्रमणकारियों के खिलाफ हिंदू शाही शासकों, चंदेलों, सोलंकियों और चौहानों के प्रतिरोध का भी उल्लेख किया गया है।

वर्तमान कर्नाटक के उल्लाल की शासक रानी अब्बक्का चौटा (1525 से 1570) ने पुर्तगालियों की नौसेना का डटकर सामना किया था। काकतीय वंश की रानी रुद्रमा देवी का भी इस किताब में उल्लेख किया गया है, जिन्होंने दिल्ली सल्तनत के समक्ष प्रतिरोध किया था।

चर्चित प्रतिरोध गाथाओं में क्या है?

पाठ्यपुस्तक में बताई गईं कम चर्चित प्रतिरोध गाथाओं में मदुरै के मुथु वीरप्पा नायक की कहानी भी शामिल है। माना जाता है कि उन्होंने मुगल दरबार की ओर से भेजी गई चप्पल के सामने झुकने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय उसमें अपना पैर रख दिया था।

किताब में यह भी बताया गया है कि तमिलनाडु के जिंजी (सेनजी) किले को 2025 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। इसके के अनुसार किले पर विजयनगर नायकों, बीजापुर सल्तनत, मुगलों, मराठों, फ्रांसीसियों और अंग्रेजों का शासन रहा।

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रानी दुर्गावती का भी जिक्र

इस किताब में शामिल ऐतिहासिक हस्तियों में रानी दुर्गावती भी थीं, जिन्हें गढ़ा/गोंड राज्य में साहस, नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता वाली शासक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस किताब में 'द माइटी मराठा वुमेन' विषय के तहत ताराबाई और अहिल्याबाई होलकर का भी उल्लेख किया गया है।

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