NCERT language teaching: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) भारत में विभिन्न भाषाएं सिखाने वाले शिक्षकों के लिए एक नया कोर्स तैयार कर रहा है। भारत में जल्द ही भाषा सिखाने का एक नया मॉडल देखने को मिल सकता है। यह बहु-भाषा शिक्षा कार्यक्रम है, जिसके तहत शिक्षकों को एक से अधिक भाषाएं सिखाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कन्फर्म किया है कि NCERT, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 फ्रेमवर्क के तहत बहु-भाषा शिक्षा के एक मॉडल पर काम कर रहा है। यह प्रस्ताव काउंसिल के एकेडमिक एक्सपेंशन का हिस्सा है, जिसके बाद इसे एक इंस्टीट्यूशन डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी में बदल दिया जाएगा। न्यूज 18 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित पहल के केंद्र में मल्टीलिंगुअल एजुकेशन में मास्टर प्रोग्राम है। इससे एप्लाइड लिंग्विस्टिक्स और मल्टीलिंगुअल पेडागॉजी में विशेषज्ञता रखने वाले शिक्षकों के एक नए कैडर को ट्रेनिंग मिलने की उम्मीद है। पारंपरिक व्यवस्था में जहां भाषा शिक्षकों को आमतौर पर एक खास भाषा सिखाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। वहीं प्रस्तावित मॉडल शिक्षकों को कई भाषाएं सिखाने के लिए तैयार करना चाहता है।
अभी विकास के चरण में है प्रपोजल
इनमें क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं और विदेशी भाषाओं का संयोग शामिल हो सकता है। इसका मकसद स्कूलों को हर भाषा के लिए अलग टीचर हायर किए बिना अपनी सिखाई जाने वाली भाषाओं के दायरे को बढ़ाने में मदद करना है। हालांकि, प्रपोजल अभी विकास के चरण में है। योजना से जुड़े सूत्रों ने बताया कि एक टीचर को कितनी भाषाएं सिखाने की ट्रेनिंग दी जा सकती है और हर भाषा में कितनी जानकारी चाहिए, जैसे विवरणों पर NCERT और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी अभी काम कर रहे हैं।
प्रस्तावित मॉडल कैसे काम करेगा?
NCERT क्यों बना रहा है एक नया मॉडल?
प्रस्तावित मल्टीलिंगुअल शिक्षा कार्यक्रम, NCERT के एकेडमिक रोल के बड़े रीस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है। शिक्षा मंत्रालय के 30 मार्च को जारी नोटिफिकेशन में NCERT को “अलग श्रेणी” के तहत इंस्टीट्यूशन डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का स्टेटस दिया गया था। नोटिफिकेशन में काउंसिल से रिसर्च, डॉक्टोरल और इनोवेटिव एकेडमिक प्रोग्राम शुरू करने के लिए भी कहा गया। इस बदलाव के बाद एनसीईआरटी को स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम डिजाइन करने, चलाने और टीचर एजुकेशन, रिसर्च और पेडागॉजी से जुड़े क्षेत्रों में अपनी डिग्री देने के लिए अधिक शैक्षिक स्वायत्ता मिलेगी।
लिटरेरी स्टडीज से एप्लाइड लिंग्विस्टिक्स तक
यह प्रस्तावित कार्यक्रम इस बात का संकेत देता है कि भाषा शिक्षक कैसे तैयार होते हैं, इसमें एक संभावित बदलाव हो सकता है। पारंपरिक रूप से, भाषा शिक्षा में अक्सर साहित्य पर काफी जोर दिया जाता रहा है, जिसमें साहित्यिक लेखों, लेखकों और किसी भाषा के इतिहास का अध्ययन शामिल होता है। प्रस्तावित मॉडल भाषा सीखने और सिखाने के साइंस और प्रैक्टिस पर ज्यादा जोर देगा। एप्लाइड लिंग्विस्टिक्स भाषाएं सीखने और इस्तेमाल करने पर ध्यान देता है। जबकि मल्टीलिंगुअल पेडागॉजी उन छात्रों को पढ़ाने पर फोकस करती है जो एक से अधिक भाषाएं सीखते या इस्तेमाल करते हैं।