NEET Paper Leak: NTA के 3 एक्सपर्ट ने तोड़ी गोपनीयता! CBI चार्जशीट में 13 आरोपी, सामने आई पूरी कहानी

NEET Paper Leak: नीट 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने एक बड़ा खुलासा किया है। सीबीआई की ओर से दिल्ली की एक अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट के मुताबिक NTA के तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने परीक्षा से जुड़ी गोपनीयता की शर्त का उल्लंघन किया और नीट 2026 परीक्षा के प्रश्नों को लीक कर उन्हें आगे बढ़ाया।

अपडेटेड Aug 08, 2026 पर 9:31 AM
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CBI का बड़ा खुलासा, NTA के 3 एक्सपर्ट्स पर पेपर लीक का आरोप

NEET Paper Leak: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने एक बड़ा खुलासा किया है। सीबीआई की ओर से दिल्ली की एक अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट के मुताबिक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने परीक्षा से जुड़ी गोपनीयता की शर्त का उल्लंघन किया और नीट-यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्नों को लीक कर उन्हें आगे बढ़ाया। पीटीआई और एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई द्वारा दायर की गई इस चार्जशीट में कुल 13 आरोपियों के नाम शामिल हैं, जिनके खिलाफ लगे आरोपों, जुटाई गई साक्ष्यों और उनकी गिरफ्तारी के क्रम की पूरी जानकारी दी गई है।

गोपनीयता के प्रमाण पत्र का उल्लंघन और फर्जी घोषणा

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक बायोलॉजी की एक्सपर्ट मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री के एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी और फिजिक्स की एक्सपर्ट मनीषा संजय हवलदार ने परीक्षा से जुड़ा काम संभालने से पहले सर्टिफिकेट ऑफ कॉन्फिडेंशियल्टील पर साइन किए थे। इसमें उन्होंने घोषणा की थी कि वे एनटीए द्वारा आयोजित किसी भी प्रवेश परीक्षा की कोचिंग में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हैं। उन्होंने यह भी वचन दिया था कि वे प्रश्न पत्र को स्वयं न तो लिखेंगे और न ही टाइप करेंगे, इसे अपने पास रखते समय हमेशा बंद ताले में रखेंगे और प्रश्नों का कोई भी नोट, कॉपी या रफ ड्राफ्ट अपने पास नहीं रखेंगे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन तीनों विशेषज्ञों ने इन सभी प्रतिबद्धताओं को तोड़ा।


घर पर कोचिंग क्लास, लीक सवाल और अवैध कमाई

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि मनीषा मंधारे पुणे स्थित अपने आवास से कोचिंग कक्षाएं चला रही थीं। पीवी कुलकर्णी परीक्षा से ठीक पहले अपने घर और पुणे में अन्य स्थानों पर उम्मीदवारों के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित कर रहे थे। इसके अलावा मनीषा हवलदार ने स्वयं और अपने सहयोगियों के माध्यम से गोपनीय प्रश्न पत्रों को प्रसारित किया।

जांच एजेंसी के अनुसार बायोलॉजी एक्सपर्ट मनीषा मंधारे परीक्षा से पहले गोपनीय प्रश्नों के प्रसार से जुड़ी थीं, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से सामग्री को संभाला और अवैध फायदे के लिए प्रश्न नोट्स की प्रिंटिंग और उसे बांटने में मदद की। केमिस्ट्री एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी ने पैसों के लालच में उम्मीदवारों के साथ लीक हुए केमिस्ट्री के प्रश्न साझा किए, वे अभ्यर्थियों, अभिभावकों और सह-आरोपियों के संपर्क में रहे और पैसे जुटाने की साजिश का हिस्सा बने। फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा हवलदार ने इलेक्ट्रॉनिक मीडियम से लीक हुए फिजिक्स के प्रश्न भेजे, प्रिंटिंग और डिलीवरी में सहयोग किया और पैसे के लिए पूरी साजिश में शामिल रहीं।

आरोपियों पर लगाई गई सख्त धाराएं और आजीवन कारावास का प्रावधान

सीबीआई ने इन तीनों विषय विशेषज्ञों को लोक सेवक माना है, क्योंकि एनटीए ने उन्हें परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री सौंपी थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार का मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग अलग धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, साक्ष्य गायब करने, लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति प्राप्त करने और धोखाधड़ी के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों को भी जोड़ा गया है। इसमें संगठित पेपर लीक के लिए कम से कम 5 साल से लेकर 10 साल तक की जेल और न्यूनतम 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। बीएनएस (BNS) के तहत लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात के अपराध में अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का भी प्रावधान है।

13 मई से शुरू हुआ गिरफ्तारियों का सिलसिला

सीबीआई ने अपनी जांच में 13 मई को हुई पहली गिरफ्तारी से लेकर पूरे घटनाक्रम के बारे में भी बताया है। सबसे पहले राजस्थान में मांगीलाल, दिनेश और विकास बीवाल को गिरफ्तार किया गया था। इनके मोबाइल फोन से 29 अप्रैल को टेलीग्राम पर मिले लीक पीडीएफ फाइलों को बरामद किया गया था। उसी दिन गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया गया। व्हाट्सऐप पर Ap Broker नाम का उपनाम इस्तेमाल करने वाले खैरनार पर लीक हुए केमिस्ट्री प्रश्नों को बांटने का कोआर्डिनेशन करने का आरोप है। 13 मई को ही पुणे से धनंजय लोखंडे को अपनी गिरफ्तारी से पहले फोन नष्ट करने की कोशिश के आरोप में पकड़ा गया था।

इसके बाद 14 मई को मनीषा संजय वाघमारे, 15 मई को लातूर से मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी और 16 मई को पुणे से मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया गया। 17 मई को लातूर में एक कोचिंग सेंटर के संस्थापक शिवराज मोतेगांवकर को गिरफ्तार किया गया। अंतिम गिरफ्तारियां 22 मई और 26 मई को हुईं, जब मनीषा संजय हवलदार, तेजस शाह और डॉ. मनोज शिरूरे को हिरासत में लिया गया। सीबीआई के अनुसार, मोबाइल उपकरणों की फॉरेंसिक इमेजिंग से हटाए गए व्हाट्सऐप चैट और पीडीएफ फाइलों को रिकवर करने में मदद मिली, जिससे पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ।

20,000 पन्नों की चार्जशीट और 360 गवाह

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक राउज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई ने अपनी लगभग 20000 पन्नों की चार्जशीट पर दलीलें दीं, जिसके बाद अदालत ने मामले को संज्ञान के लिए लिस्टेड कर दिया। सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस मामले में 360 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, 422 दस्तावेजों और 43 फिजिकल एविडेंस पेश किया गया है। मामले के सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी ने यह भी जानकारी दी कि 12 मई 2026 को एफआईआर दर्ज होने के बाद 72 अधिकारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमों द्वारा कई राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई थी।

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