नेपाल में आई विशानकारी बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है वहीं हजारों लोग अभी भी लापता हैं। आपदा के बाद राहत और बचाव का काम जारी है, लेकिन कई इलाकों में हालात अब भी खराब हैं। वहीं भारत के कई श्रद्धालु धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल जाते हैं। हाल ही में तमिलनाडु के 21 श्रद्धालु कुछ दिन पहले धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गए थे। उन्हें नहीं पता था कि उनकी यात्रा अचानक मुसीबत में बदल जाएगी। वहीं शुक्रवार को सभी श्रद्धालु सुरतक्षित भारत लौट आए हैं। वहीं भारत आने के बाद उन्होंने नेपाल में हुए तबाही का भयानक मंजर के बारे में बताया।
शुक्रवार को तमिलनाडु के 21 श्रद्धालु सुरक्षित भारत लौट आए। चेन्नई एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय उनके चेहरे पर कई तरह की इमोशनल नजर आईं। नेपाल में बिताए मुश्किल समय को याद कर वे भावुक और डरे हुए थे, लेकिन घर वापस पहुंचने की खुशी भी उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी। लंबी और कठिन यात्रा के बाद अपने देश लौटना उनके लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं था। बता दें, 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद पहाड़ों से पानी, बर्फ, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे आया, जिससे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास कई इलाकों में भारी तबाही मच गई। इस हादसे में कई गांव प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई।
ऐसा लगा जैसे कोई बम धमाका हुआ हो
इस हादसे में बचीं विजयभुवनेश्वरी ने उस डरावने पल को याद करते हुए बताया कि अचानक आई बाढ़ ने उनकी तीन बसों के काफिले को अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने NDTV को बताया, “बाढ़ आने के दौरान इतनी तेज आवाज हुई, जैसे कोई बम धमाका हुआ हो। आगे और पीछे की बसें फंस गईं, इसलिए हम अपनी जान बचाने के लिए ऊपर की ओर चढ़ गए। इसके बाद हम उस पहाड़ी पर पहुंचे, जहां आर्म्ड रिजर्व पुलिस कैंप था। वहां पुलिस ने हमारी मदद की और हमें सुरक्षित जगह पर रखा।” शुक्रवार को चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे 21 तीर्थयात्रियों का स्वागत तमिलनाडु के मंत्री नारायणसामी आनंद और मंत्री डी सरथकुमार ने किया।
उन्होंने बताया कि उस मुश्किल समय में उनके दिमाग में हर वक्त सिर्फ अपनी बेटी की चिंता चल रही थी। किरुबाथिरी के लिए यह हादसा किसी दूसरी जिंदगी मिलने जैसा था। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह एक नया जन्म है। मैं किसी से शिकायत नहीं कर सकती। क्लाइमेट चेंज एक सच्चाई है और गरीब लोगों को अक्सर दूसरों की गलतियों का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है।” वहीं, वल्लीनायकी ने बाढ़ के इस भयावह मंजर को ज्वालामुखी फटने जैसा बताया। उन्होंने बताया, “यह हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे कंक्रीट का कोई ज्वालामुखी फट गया हो और सब कुछ अपनी चपेट में ले रहा हो।”
अब तक 620 से ज्यादा लोगों की हुई मौत
तिब्बत सीमा के पास बाढ़ से प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्य में मदद के लिए शनिवार को भारत की 11 सदस्यीय टीम नेपाल पहुंची। यह टीम स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और बचाव अभियान में सहयोग करेगी। नेपाल और तिब्बत में बाढ़ के बाद हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। इस आपदा में नेपाल में 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सीमा के दोनों तरफ 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।