यूपी के इस गांव में बरसों से नहीं उठी कोई डोली और न आई बारात, जानिए क्यों यहां शादी करने से कतराते हैं लोग

उत्तर प्रदेश में एक गांव ऐसा है, जहां लोग शादी करने से कतराते हैं। इस गांव में बरसों से न तो कोई बारात आई है और न कोई डोली उठी है। ग्रामीणों का दावा है कि यहां दो किलोमीटर की यात्रा भी 200 किलोमीटर के समान लगती है। लोगों को यहां पहुंचने में काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है

अपडेटेड Sep 17, 2026 पर 8:50 PM
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मिर्जापुर के दांती और गौरा विसेन गांवों को जोड़ने वाली सड़क को सालों से बनाने की मांग की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक गांव में शादी करना मुश्किल हो गया है। गांव का नाम सुनते ही शादी का इच्छुक वर या कन्या पक्ष दूर चले जाते हैं। लेकिन इसका शादी से कोई खास लेना-देना नहीं है। यहां न तो कई अपनी बेटी देना चाहता है और न यहां की लड़की से शादी करना चाहता है। इसकी वजह एक सड़क है, जिसके बारे में गांव वालों का कहना है कि वह दशकों से खराब हालत में है। सालों से सड़क बनने का इंतजार कर रहे ग्रामीण अब सड़क बनवाने की मांग करते हुए धरने पर बैठ गए हैं।

लोगों के मुताबिक, मिर्जापुर के दांती और गौरा विसेन गांवों को जोड़ने वाली सड़क को सालों से बनाने की मांग की जा रही है। खस्ताहाल सड़क की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बच्चों के स्कूल जाने से लेकर मरीजों को मेडिकल सेंटर ले जाने की कोशिश करने वाले परिवारों तक, सभी मुश्किलों से जूझ रहे हैं।

खरंजा फॉल्स और दांती के बीच की दूरी लगभग दो किलोमीटर है। लेकिन लोगों को रास्ते की खराब हालत की वजह से वे यह दूरी 200 किमी जैसी लगती है। गांववालों का कहना है कि सड़क पथरीली है और उस पर आना-जाना मुश्किल हो जाता है। मानसून में हालत और खराब हो जाती है। गांववालों के लिए, जो सफर छोटा होना चाहिए, वह एक बड़ी मुसीबत बन जाता है। सड़क की समस्या ने जरूरी सेवाओं तक पहुंच पर भी असर डाला है।

‘कोई भी अपनी बेटी इस गांव में नहीं देना चाहता’

गांववालों का कहना है कि सड़क की समस्या अब शादियों पर भी असर डालने लगी है। यहां रहने वाले धीरज मौर्य ने कहा कि बार-बार मरम्मत की मांग के बावजूद सड़क सालों से खराब हालत में है। मौर्य के मुताबिक, सड़क की हालत ने इतनी मुश्किलें पैदा कर दी हैं कि गांव के युवाओं को शादी के लिए साथी ढूंढने में मुश्किल हो रही है। उन्होंने कहा, “कोई भी अपनी बेटी इस गांव में नहीं देना चाहता।” उन्होंने कहा, “हम सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसीलिए अब हम धरना दे रहे हैं।” इसलिए यह मुद्दा सिर्फ़ ट्रांसपोर्टेशन की समस्या से कहीं ज्यादा हो गया है।

दशकों पुरानी है सड़क की मांग


लोगों का दावा है कि आजादी के बाद से ही सड़क बनाने की मांग बार-बार उठाई जाती रही है। ग्रामीणों का दावा है कि वन विभाग ने जमीन से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए सड़क बनाने के लिए जरूरी जमीन नहीं दी है। इससे सड़क प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया है और उन्हें मौजूदा रास्ते से ही जूझना पड़ रहा है।

‘यह सड़क जरूर बननी चाहिए’

स्थानीय निवासी रोहित शुक्ला ने कहा कि गांव वालों की मांग सही है। उन्होंने कहा, “हम सभी इस मांग का समर्थन करते हैं। यह सड़क जरूर बननी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि रास्ते की खराब हालत की वजह से, गांव वालों को कभी-कभी कई किलोमीटर ज्यादा सफर करना पड़ता है।

गांव वालों ने किया चुनाव का बॉयकॉट

सुनील कुमार पाल ने कहा कि लोगों ने पहले भी सड़क के मुद्दे पर कड़ा विरोध किया था। उन्होंने कहा, “हमने पिछले साल भी वोट का बॉयकॉट किया था। हमें भरोसा दिलाया गया था कि सड़क ठीक कर दी जाएगी, लेकिन अभी तक ठीक नहीं हुई है।”

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