बिहार की राजधानी पटना में अब तक लोग मेट्रो ट्रेन से सफर करने का आनंद ले रहे हैं। इसके बाद, आने वाले दिनों में गंगा की लहरों पर आधुनिक जहाज से यात्रा करने का उनका सपना भी साकार हो सकता है। कल्पना कीजिए, सड़क पर जाम की लंबी कतारों से दूर आप एसी की ठंडी हवा और आरामदायक सीटों के बीच गंगा के खूबसूरत नजारों का आनंद लेते हुए एक घाट से दूसरे घाट तक पहुंच रहे हों। पटना में प्रस्तावित वॉटर मेट्रो परियोजना इसी तस्वीर को हकीकत में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस परियोजना के तहत दीघा पर्यटन घाट से एनआईटी घाट, गायघाट होते हुए कंगन घाट तक वॉटर मेट्रो चलाने की योजना है। हालांकि, परियोजना को लेकर तैयारियां और घोषणाएं सामने आने के बावजूद नियमित सेवा शुरू होने की निश्चित तारीख का इंतजार पिछले एक साल से लोग कर रहे हैं।
सितंबर 2025 में हुआ था समझौता
पटना में वॉटर मेट्रो सेवा शुरू करने की दिशा में 19 सितंबर 2025 को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया था। गुजरात के भावनगर में बिहार सरकार के पर्यटन विभाग और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद गंगा नदी में आधुनिक यात्री जहाजों के परिचालन की योजना को लेकर उम्मीदें बढ़ गई थी।
इस परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी का इस्तेमाल केवल पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय शहर की परिवहन व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में करना है। योजना के तहत इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड तकनीक से चलने वाले जहाजों के जरिए यात्रियों को एक घाट से दूसरे घाट तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जानी है।
पटना की प्रस्तावित वॉटर मेट्रो की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाले आधुनिक इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड जहाज होंगे। एमवी गोमधरकुंवर जहाज गाय घाट पर लगा हुआ है। इन जहाजों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे बैटरी और हाइब्रिड मोड में संचालित हो सकें। इनकी क्षमता लगभग 75 यात्रियों की बताई गई है। इसकी लंबाई करीब 42 मीटर है। यह 27 सितंबर 2025 को ही पटना पहुंचा था। इस जहाज की कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये है।
गायघाट पर पहुंचा जहाज, फिर भी शुरू नहीं हो सकी सेवा
वॉटर मेट्रो को लेकर लोगों की उत्सुकता के बीच सबसे अहम बात यह है कि परियोजना से जुड़ा जहाज पटना पहुंचने के बाद भी नियमित यात्री सेवा शुरू नहीं हो सकी। जहाज को गायघाट के पास रखा गया था और इसके परिचालन से जुड़ी तैयारियां की जा रही थी।
हालांकि, जहाज की उपलब्धता मात्र से सेवा शुरू नहीं की जा सकती। इसके लिए आवश्यक अनुमतियां, पंजीकरण, तकनीकी तैयारियां, चार्जिंग की सुविधा और यात्रियों के सुरक्षित चढ़ने-उतरने की व्यवस्था जरूरी है। परियोजना से जुड़ी इन तैयारियों और औपचारिकताओं में देरी के कारण सेवा शुरू होने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। शुरुआत में उम्मीद जताई गई थी कि विधानसभा चुनाव 2025 से पहले लोगों को वॉटर मेट्रो की सवारी करने का मौका मिल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब लोगों को इसके नियमित परिचालन की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
चार्जिंग का हो रहा है ट्रायल
इस हाइब्रिड जहाज का गंगा में सफल ट्रायल हो चुका है। इसको चार्ज करने के लिए एनआइटी और दीघा घाट पर दो चार्जिंग स्टेशन बनाया गया है। फिलहाल इसके चार्जिंग स्टेशन का ट्रायल चल रहा है। चार्जिंग का ट्रायल सफल होते ही इसे पर्यटन विकास निगम को हैंडओवर होने की उम्मीद है। इसके बाद इसके नियमित संचालन की तारीख तय की जाएगी।
कंगन और पहलवान घाट पर बनेंगे टर्मिनल
दूसरी तरफ, पटना में जल परिवहन को बेहतर बनाने के लिए केवल जहाज चलाने की ही योजना नहीं है, बल्कि इसके साथ आधुनिक रिवर क्रूज टर्मिनल विकसित करने की तैयारी भी है। प्रथम चरण में कंगन घाट और पहलवान घाट पर विश्वस्तरीय टर्मिनल बनाने की योजना है। इसके लिए दोनों स्थानों पर दो-दो एकड़ जमीन भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण को आवंटित की गई है। इन टर्मिनलों पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं, जहाजों के ठहरने की व्यवस्था और नदी तक पहुंचने के लिए आधुनिक ढांचे विकसित किए जाने की योजना है। बेहतर टर्मिनल तैयार होने से न केवल वॉटर मेट्रो के परिचालन को सहूलियत मिल सकती है, बल्कि गंगा में चलने वाले रिवर क्रूज को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट