PhonePe Rural India Plan: डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे ने गुरुवार को अगले साल भारत के छोटे शहरों और गांवों में अपने बुनियादी ढांचे को और गहराई तक पहुंचाने की योजना की घोषणा की। इसके तहत डिजिटल पेमेंट कंपनी अपने मर्चेंट नेटवर्क को बढ़ाने के लिए 20,000 ऑन-रोल सेल्स कर्मचारियों की भर्ती करेगी। कंपनी अगले 12 महीनों में 50 लाख से अधिक पेमेंट डिवाइस भी लगाएगी। इनमें स्मार्टस्पीकर और पीओएस डिवाइस शामिल होंगे। इनमें से करीब 50% डिवाइस ग्रामीण भारत में लगाए जाएंगे। इससे टियर-6 कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा और गहराई तक पहुंचेगी।
वॉलमार्ट के समर्थन वाली कंपनी फोनपे का यह कदम भारत के एनपीसीआई के उस फैसले के बाद आया है जिसमें चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगाने का फैसला किया गया है। इसका एक हिस्सा कम सेवा वाले इलाकों में छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल पेमेंट की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए रखा जाएगा। फोनपे ने कहा, "हाल ही में घोषित एमडीआर ढांचा कंपनी को लंबे समय का नजरिया रखने और मर्चेंट बढ़ाने में निवेचश करने की इजाजत देता है।" अगस्त तक, फोनपे के भुगतान नेटवर्क में 72 करोड़ से अधिक पंजीकृत यूजर और 5 करोड़ से ज्यादा मर्चेंट शामिल थे।
पिछले साल लागू किए गए नए श्रम संहिताएं भी कंपनी को प्रक्रियाओं को सरल बनाकर तेजी से भर्ती करने में सक्षम बना रही हैं। इससे बड़ी संख्या में ऑन-रोल कर्मचारियों को आसानी से कंपनी में शामिल करने में मदद मिल रही है। भारत ने दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में से एक तैयार किया है। इस यात्रा के अगले चरण में देश के हर हिस्से के छोटे कारोबारियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने में सक्षम बनाने वाले मर्चेंट पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश की जरूरत होगी।
फोनपे का प्रस्तावित विस्तार इसी अवसर को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। काफी बड़े फ्रंटलाइन ऑन-रोल कार्यबल की मदद से फोनपे छोटे कस्बों और गांवों में कारोबारियों तक पहुंच सकेगा, उन्हें डिजिटल भुगतान से जोड़ सकेगा, केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकेगा, पेमेंट डिवाइस लगा सकेगा और कारोबारियों को लगातार सहायता प्रदान कर सकेगा।
इस विस्तार से लाखों छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से और अधिक जोड़ने में भी मदद मिलेगी। डिजिटल रूप से सक्रिय और केवाईसी-अनुपालन वाला मर्चेंट नेटवर्क कारोबारी गतिविधियों को अधिक स्पष्ट रूप से सामने ला सकता है और पात्र कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं की व्यापक रेंज तक पहुंच उपलब्ध करा सकता है। इसमें ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले कर्ज भी शामिल हैं।