Aggregator Guidelines : रैपिडो, उबर और ओला जैसी बाइक टैक्सी प्लेटफॉर्म्स को बड़ी राहत मिली है। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइन 2025 जारी किए हैं, जिनमें खासतौर पर यह कहा गया है कि निजी (नॉन-ट्रांसपोर्ट) बाइक का इस्तेमाल यात्री सेवा के लिए किया जा सकता है, लेकिन यह राज्य सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा। दिशानिर्देशों में साफ तौर पर लिखा है कि राज्य सरकारें साझा परिवहन सेवाओं (शेयरिंग मोबिलिटी) के लिए निजी मोटरसाइकिलों के उपयोग की अनुमति दे सकती हैं।
वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइन जारी
इसके अलावा, गाइडलाइन में कहा गया है कि यह पहल न केवल ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी, बल्कि लोगों को सस्ता परिवहन विकल्प भी उपलब्ध कराएगी। साथ ही, हाइपरलोकल डिलीवरी सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। ये दिशानिर्देश मोटर वाहन अधिनियम की धारा 67(3) के तहत राज्य सरकारों को यह अधिकार देते हैं कि वे एग्रीगेटर कंपनियों पर रोज़ाना, साप्ताहिक या 15 दिनों के हिसाब से शुल्क लगा सकें और उन्हें अनुमति भी दे सकें। इसमें यह भी कहा गया है कि एग्रीगेटर यह सुनिश्चित करें कि उनके साथ जुड़े सभी ड्राइवर इन नियमों का पालन करें।
इस फैसले से उन ऐप-आधारित सेवाओं को कानूनी स्पष्टता मिली है जो अब तक कई राज्यों में कानूनी अनिश्चितता में काम कर रही थीं। हालांकि, अब इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य सरकारें इसे लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करती हैं या नहीं। कर्नाटक में 16 जून से बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक लगा दी गई है।
रैपिडो ने मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025 के तहत खंड 23 को लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। कंपनी ने इसे 'विकसित भारत' की ओर एक अहम कदम बताया है, जो सस्ती यात्रा, कम ट्रैफिक और प्रदूषण के साथ-साथ आखिरी मील तक डिलीवरी सेवाओं को भी बढ़ावा देगा। रैपिडो का कहना है कि इस नीति बदलाव से लाखों नए और लचीले रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और गिग इकॉनमी को अधिक संगठित रूप दिया जा सकता है। कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह राइडर की भर्ती, सुरक्षा, बीमा और नियमों के पालन जैसे मामलों में राज्य सरकारों को पूरा सहयोग देगी।