Sarva Pitru Amavasya 2026: हिंदू कैलेंडर में हर साल अश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष मनाया जाता है। 15-16 दिनों की यह अवधि स्वर्गवासी हो चुके परिजनों की आत्मा की शांति के पूजा, पाठ, हवन, श्राद्ध और तर्पण के लिए निश्चित होती है। इस अवधि का समापन अश्विन अमावस्या के दिन सर्व पितृ विसर्जन के साथ होता है। सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करते हैं। जिन पितरों का निधन किसी भी माह की अमावस्या तिथि को हुआ है, उन सभी का श्राद्ध इस दिन किया जाता है। साथ ही, जिन पितरों के निधन की तिथि नहीं पता है, उनके लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म सर्व पितृ अमावस्या को होगा। इस साल सर्व पितृ अमावस्या के दिन शनि अमावस्या और गजच्छाया योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
सर्व पितृ अमावस्या 2026 कब है?
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर दिन शुक्रवार को रात 9:35 बजे से शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन 10 अक्टूबर रविवार को रात 09:19 बजे तक उपस्थित रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को होगी। उस दिन सूर्योदय सुबह में 06:19 ए एम पर है। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म दिन के समय में करते हैं। उसके लिए कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त होता है।
सर्व पितृ अमावस्या 2026 तर्पण-श्राद्ध मुहूर्त
सर्व पितृ अमावस्या के दिन तर्पण और श्राद्ध दिन में किया जाएगा। इस साल कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त 47-47 मिनट का होगा, वहीं अपराह्न काल 2 घंटे 20 मिनट का होगा।
रौहिण मुहूर्त : दोपहर 12:31 बजे से लेकर दोपहर 01:18 बजे तक
अपराह्न काल : दोपहर 01:18 बजे से लेकर दोपहर 03:37 बजे तक
शनिश्चरी अमावस्या का संयोग
सर्व पितृ अमावस्या के दिन शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बना है। इस दिन स्नान और दान के बाद शनिदेव की पूजा करने से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट दूर होते हैं।
आश्विन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त
आश्विन अमावस्या पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे अच्छा माना जाता है। उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:40 ए एम से 05:29 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:45 ए एम से दोपहर 12:31 पी एम तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान न कर पाएं, वे सूर्योदय के बाद कर सकते हैं।
सर्व पितृ अमावस्या 2026 गजच्छया योग
गजच्छाया योग हर साल नहीं मिलता है। लेकिन इस योग का निर्माण आमतौर से पितृ पक्ष के समय ही होता है। इसे श्राद्ध कर्म, दान-पुण्य आदि गतिविधियों के लिये अत्यधिक शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष की अमावस्या तिथि पर, जब सूर्य और चंद्रमा हस्त नक्षत्र में होते हैं, तो इस संयोग को गजच्छया योग के रूप में जाना जाता है। इसीलिये, पितृ पक्ष की समयावधि में एक अथवा दो गजच्छया योग भी हो सकते हैं। यह शुभ संयोग त्रयोदशी तिथि या अमावस्या तिथि को निर्मित होता है।
10 अक्टूबर गजच्छाया योग समय
गजच्छाया योग प्रारंभ : अक्टूबर 9, 2026, शुक्रवार को 21:35 बजे
गजच्छाया योग समाप्त : अक्टूबर 10, 2026, शनिवार को 21:19 बजे