'शुक्र है समय रहते चले गए'; नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में मचा घमासान! सोनिया गांधी पर BJP नेता गिरिराज सिंह का तीखा पलटवार
Sonia Gandhi vs. Nitish Kumar: कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि पार्टी को नीतीश कुमार को INDIA गठबंधन से बाहर नहीं जाने देना चाहिए था। उनके मुताबिक, अगर नीतीश गठबंधन में बने रहते तो राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं
सोनिया गांधी ने कांग्रेस नेताओं से कहा कि चुनाव से पहले नीतीश कुमार का विपक्षी गठबंधन से बाहर जाना अच्छा था
Sonia Gandhi vs. Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रमुख नीतीश कुमार के 2024 में विपक्षी 'INDIA' गठबंधन से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले NDA में वापस जाने को लेकर कांग्रेस के भीतर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। मंगलवार (29 सितंबर) को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में INDIA ब्लॉक से नीतीश कुमार के बाहर निकलने को लेकर अलग-अलग राय सामने आई। सीनियर नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि पार्टी को JDU प्रमुख को बाहर नहीं जाने देना चाहिए था। वहीं, इसके विपरित सोनिया गांधी ने कहा कि उनका समय रहते चले जाना ही बेहतर था।
कांग्रेस सूत्रों ने 'न्यूज 18' को बताया, दिग्विजय सिंह ने CWC से कहा कि अगर नीतीश कुमार विपक्ष के गठबंधन का हिस्सा बने रहते तो राजनीतिक हालात कुछ और हो सकते थे। सिंह ने कहा, "हमें नीतीश कुमार को INDIA ब्लॉक से बाहर नहीं जाने देना चाहिए था। अगर वह बने रहते, तो राजनीतिक स्थिति अलग होती।"
दिग्विजय सिंह से सोनिया गांधी असहमत
हालांकि, सोनिया गांधी इस बात से सहमत नहीं थीं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार हमेशा गठबंधन से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी ने कहा, "शुक्र है नीतीश कुमार समय रहते चले गए। उन्हें तो उधर ही जाना था। वह लगातार INDIA ब्लॉक से बाहर निकलने के नए तरीके ढूंढ रहे थे।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीतीश कुमार को BJP कंट्रोल कर रही थी।
यह बातचीत तब हुई जब कांग्रेस अपनी राजनीतिक रणनीति और INDIA ब्लॉक के अगले कदम पर चर्चा कर रही थी। यह चर्चा ऐसे समय में हो रही थी जब चुनाव आयोग के साथ वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर टकराव चल रहा था।
गिरिराज सिंह का पलटवार
इस बीच, केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता गिरिराज सिंह ने कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी के बयान पर कहा, "नीतीश कुमार ने कभी जीवन में ना भ्रष्टाचारियों को प्रश्रय दिया ना देश विरोधियों को प्रश्रय दिया। राष्ट्र के साथ जुड़े रहे और राष्ट्र हित में काम किया। सोनिया गांधी जिन्होंने देश के साथ द्रोह किया, भारत की नागरिकता 15 साल बाद ली। ये सोनिया गांधी दूसरों को क्या कहेगी? सोनिया गांधी की नैतिक ताकत नहीं है कि वे नीतीश कुमार के पर प्रहार कर सकें।"
कांग्रेस के साथ कुमार के लंबे और उलझे हुए रिश्ते
पिछले एक दशक में कांग्रेस के साथ नीतीश कुमार के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। 2015 में नीतीश कुमार RJD और कांग्रेस के साथ 'महागठबंधन' का हिस्सा बनकर बिहार में सत्ता में लौटे। इस गठबंधन ने राज्य विधानसभा चुनाव में BJP के नेतृत्व वाले NDA को हराया था। लेकिन 2017 में कुमार विपक्षी गठबंधन से बाहर निकल गए और NDA में वापस चले गए।
पांच साल बाद अगस्त 2022 में कुमार ने फिर से BJP से नाता तोड़ लिया। फिर RJD, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई। वह आठवीं बार मुख्यमंत्री बने। तेजस्वी यादव उनके डिप्टी बने। विपक्षी खेमे में वापसी के बाद कुमार को 'INDIA' ब्लॉक बनाने में एक अहम राष्ट्रीय भूमिका मिली। जून 2023 में पटना में विपक्ष की पहली बड़ी बैठक कुमार ने ही बुलाई थी, जिसमें BJP के खिलाफ एक साझा मोर्चा बनाने पर चर्चा के लिए कई पार्टियों को एक साथ लाया गया था।
इसके बाद उन्हें गठबंधन के संभावित संगठनात्मक चेहरों में से एक के तौर पर देखा जाने लगा। दिसंबर 2023 में 'INDIA' ब्लॉक के कुछ नेताओं के बीच उन्हें गठबंधन का संयोजक बनाने पर चर्चा हुई। उस समय खबरों में कहा गया था कि कई नेता चाहते थे कि कुमार यह भूमिका संभालें। जबकि कांग्रेस के नेता ऐसे किसी पद के निर्माण के खिलाफ थे जिससे गठबंधन में पार्टी की भूमिका कम हो सकती थी।
जनवरी 2024 में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 'INDIA' ब्लॉक का अध्यक्ष चुना गया। जबकि संयोजक पद के लिए कुमार का नाम प्रस्तावित किया गया। हालांकि, कुमार ने तुरंत अपनी सहमति नहीं दी। गठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ बातचीत करना चाहा। लेकिन कुछ ही हफ्तों के भीतर, बिहार में गठबंधन टूट गया।
RJD-कांग्रेस से तोड़ा नाता
28 जनवरी 2024 को, कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने RJD और कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन खत्म कर दिया और BJP के नेतृत्व वाले NDA में वापस लौट आए। इसके बाद उन्होंने BJP के समर्थन से फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनका यह कदम 'INDIA' ब्लॉक के लिए विपक्षी दलों को एक साथ लाने में अहम भूमिका निभाने के कुछ ही महीनों बाद उठाया गया था। यही घटनाक्रम अब कांग्रेस के भीतर असहमति की मुख्य वजह है।
CWC में सिंह का तर्क था कि अगर कुमार को साथ बनाए रखा जाता तो विपक्ष की स्थिति कुछ और हो सकती थी। कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने यह भी कहा कि 'INDIA' ब्लॉक में बड़ी संगठनात्मक भूमिका निभाने की कुमार की इच्छा उन वजहों में से एक थी जिन्हें बेहतर ढंग से संभाला जा सकता था। हालांकि, गांधी की प्रतिक्रिया कुमार के राजनीतिक सफर को अलग नजरिए से देखती हैं। उनका मानना है कि कुमार का जाना आखिरकार तय था। वह BJP खेमे में लौटने का मौका तलाश रहे थे।
विपक्ष में नए मतभेदों के बीच 'INDIA' ब्लॉक की बैठक
यह चर्चा दिल्ली में 'INDIA' ब्लॉक की बैठक से एक दिन पहले हो रही है, जिसमें विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया पर अपनी रणनीति पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रही है। साथ ही उसने चुनाव आयोग पर चुनावी प्रक्रिया से समझौता करने का आरोप लगाया है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। इस बीच, INDIA गठबंधन में भी बैठक में शामिल होने को लेकर नए मतभेद सामने आए हैं। DMK, AAP और अखिलेश यादव जैसे कुछ सहयोगी दलों ने बैठक से दूर रहने का फैसला किया है, हालांकि समाजवादी पार्टी अपना प्रतिनिधि भेज रही है। इस माहौल में, कुमार को लेकर CWC में हुई चर्चा ने कांग्रेस के भीतर एक पुराना सवाल फिर से खड़ा कर दिया है।