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Super El Niño 2026: क्या फिर लौटेगा 1877 जैसा महाविनाश? वैज्ञानिकों की चेतावनी- 'सुपर अल नीनो से भारत पर मंडरा रहा भयंकर खतरा'

Super El Niño India Risk: इतिहासकार और वैज्ञानिक 1877-78 के सुपर अल नीनो को मानवता के लिए सबसे बड़ी पर्यावरणीय आपदा मानते हैं। शोध के अनुसार, उस दौरान आए अकाल और हैजा, प्लेग और मलेरिया जैसी बीमारियों से भारत में 1.2 करोड़ से 2.9 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। कुल मिलाकर दुनिया भर में 5 करोड़ लोगों ने जान गंवाई थी

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड May 13, 2026 पर 4:48 PM
Super El Niño 2026: क्या फिर लौटेगा 1877 जैसा महाविनाश? वैज्ञानिकों की चेतावनी- 'सुपर अल नीनो से भारत पर मंडरा रहा भयंकर खतरा'
अल नीनो एक प्राकृतिक समुद्री घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है

Super El Niño Risk: दुनिया भर के जलवायु वैज्ञानिक एक ऐसी प्राकृतिक आपदा की आहट से सहमे हुए हैं, जिसने 150 साल पहले करोड़ों लोगों की जान ले ली थी। नए शोध और सैटेलाइट डेटा संकेत दे रहे हैं कि प्रशांत महासागर में एक 'सुपर अल नीनो' (Super El Niño) आकार ले रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह 1877-78 के उस भयावह दौर की याद दिला रहा है, जिसने भारत समेत पूरी दुनिया में भीषण अकाल और महामारियों को जन्म दिया था।

क्या है अल नीनो और 'सुपर' अल नीनो?

अल नीनो (El Niño) एक प्राकृतिक समुद्री घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। सामान्य अल नीनो हर कुछ सालों में आता है और वैश्विक मौसम को प्रभावित करता है। वहीं जब समुद्र का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाए, तो इसे 'सुपर अल नीनो' कहते हैं।

'यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट' के अनुसार, 2026 के अंत तक तापमान औसत से 3 डिग्री सेल्सियस ऊपर जा सकता है। जिससे यह इतिहास का सबसे शक्तिशाली अल नीनो साबित हो सकता है।

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