Surya Ghar Yojana: एक छोटे से गांव में रमेश (बदला हुआ नाम) अपने परिवार के साथ रहता था। हर महीने उसका बिजली का बिल काफी आता था, जिससे घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता था। एक दिन रमेश को 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' के बारे में पता चला। उसने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगवाया। सरकार से उसे सब्सिडी भी मिली, जिससे खर्च कम हो गया। कुछ ही दिनों में उसके घर में सौर ऊर्जा से बिजली बनने लगी। अब उसे दिन में बिजली के लिए ज्यादा पैसे नहीं देने पड़ते थे। कई बार जरूरत से ज्यादा बिजली बनने पर वह उसे बिजली ग्रिड में भेज देता था और बदले में लाभ भी पाता था।
