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‘तब आप Gen Z नहीं हैं’, CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका की उम्र पूछ कोर्ट ने की दिलचस्प टिप्पणी

दिल्ली हाई कोर्ट में CJP से जुड़े नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं की उम्र को लेकर कहा कि अगर आपकी उम्र इतनी है, तो तब आप Gen Z नहीं हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी चेतन शर्मा और वकील आशीष दीक्षित पेश हुए।

shankar anandअपडेटेड Oct 21, 2026 पर 1:59 PM
‘तब आप Gen Z नहीं हैं’, CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका की उम्र पूछ कोर्ट ने की दिलचस्प टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। फोटो क्रेडिट: ANI

दिल्ली हाईकोर्ट में CJP से जुड़े नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अदालत में चली सुनवाई और तीखी टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका को वापस ले लिया है। आपको बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं की उम्र को लेकर एक दिलचस्प टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आपकी उम्र इतनी है, तो तब आप Gen Z नहीं हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी चेतन शर्मा और वकील आशीष दीक्षित पेश हुए, जबकि सौरव दास और अन्य की तरफ से वकील अभिक चिमनी ने पैरवी की। गौरतलब है कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़े मामलों के बाद अपनी हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। यह सुनवाई स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर हो रही है, जिसमें दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाई गई थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई और वकीलों की दलीलें

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील अभिक चिमनी ने एसईएम के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट ने केवल यह कहा कि उन्होंने राज्य का पक्ष सुन लिया है और शांति भंग होने की आशंका है, लेकिन इस आशंका के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताए गए हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि अगर वह इस आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करते हैं, तो एसईएम के समक्ष सुनवाई के दौरान उनके जमानती को किसी नए आधार पर खारिज किया जा सकता है। इस पर अदालत ने सवाल किया कि क्या पहले दिए गए बॉन्ड का उल्लंघन होने की आशंका पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं है? कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह निवारक हिरासत (Preventive Detention) का मामला है, तो इसके खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) दाखिल की जा सकती है। कोर्ट ने वकील से पूछा कि क्या वे दो उचित जमानती भी पेश नहीं कर सकते?

'तब आप Gen Z नहीं हैं' - अदालत की दिलचस्प टिप्पणी

सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब अदालत ने वकील चिमनी से दोनों याचिकाकर्ताओं की उम्र के बारे में पूछा। वकील ने जवाब दिया कि उनकी उम्र 27 और 31 वर्ष है। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘तब आप Gen Z नहीं हैं।’ इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि मिलेनियल्स किस उम्र के लोगों को कहा जाता है।

बैरिकेड तोड़ने और कानून-व्यवस्था पर कोर्ट की कड़ी चिंता

अदालत ने प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता इस प्रदर्शन में सबसे आगे हैं। जब आप वहां जाकर बैरिकेड तोड़ते हैं, तो इस बात की पूरी आशंका रहती है कि पीछे 10-20 अन्य लोग भी ऐसा ही करने लगें, जिन पर आपका नियंत्रण नहीं होता। अदालत ने अन्य देशों का उदाहरण देते हुए बड़ी टिप्पणी की कि हमने दूसरे देशों में भी देखा है कि शुरुआत शांतिपूर्ण तरीके से होती है, लेकिन बाद हालात कहां पहुंच जाते हैं। कोर्ट ने कहा कि आप बिना अनुमति के वहां गए और बैरिकेड तोड़ा, ऐसे में यहां आखिर क्या हो रहा है? जब शांति और कानून-व्यवस्था भंग होने की आशंका होती है, तब यह सवाल भी प्रासंगिक हो जाता है कि संबंधित लोग कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है।

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