Monsoon Update in UP: उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार पूरे राज्य को कवर कर लिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के लखनऊ आंचलिक केंद्र के अनुसार 2 जुलाई तक मानसून ने पूरे प्रदेश में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। हालांकि मानसून की पूर्ण एंट्री के बावजूद राज्य के कई हिस्सों में बारिश की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली बनी हुई है। बारिश के ताजा आंकड़ों के अनुसार यूपी के 30 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से बेहद कम यानी 60 से 99 प्रतिशत तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की सक्रियता अब बढ़ने वाली है लेकिन शुरुआती चरण में अलग-अलग इलाकों बारिश का असमान वितरण खेती और जल संसाधनों पर निगेटिव असर भी डाल सकते हैं।
पूरे यूपी में मानसून पहुंचा लेकिन बारिश की रफ्तार को लेकर चिंता
IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून के यूपी में सक्रिय होने से आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं लेकिन अब तक के आंकड़े दिखाते हैं कि प्रदेश में बारिश का वितरण काफी असंतुलित रहा है। कुछ जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है तो कई जिले गंभीर कमी झेल रहे हैं।
इन 30 जिलों में अबतक बेहद कम बारिश
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार नीचे दिए गए जिलों में सामान्य से 60% से 99% तक कम बारिश हुई है:-
मौसम विभाग के मुताबिक, इन जिलों में बारिश की बड़ी कमी खरीफ फसलों की बुवाई, भूजल स्तर और जलाशयों पर दबाव बढ़ा सकती है।
सामान्य से कम बारिश वाले इन 28 जिलों का भी हाल कुछ ठीक नहीं
मौसम विभाग की रिपोर्ट में 28 जिलों को सामान्य से कम बारिश की कैटगरी में रखा गया है। इन जिलों में 20% से 59% तक कम बारिश दर्ज हुई है- अयोध्या, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, बस्ती, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, कानपुर नगर, खीरी, महाराजगंज, मिर्जापुर, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, सोनभद्र, सुल्तानपुर, अलीगढ़, अमरोहा, औरैया, बागपत, बरेली, बिजनौर, इटावा, हमीरपुर, हापुड़, मैनपुरी और रामपुर।
सिर्फ कुछ जिलों में राहत वाली तस्वीर
यूपी के कुछ हिस्सों में बारिश की स्थिति बेहतर दिखाई दे रही है।
सामान्य से बेहद अधिक बारिश (+60% से अधिक)
सामान्य से अधिक बारिश (+20% से +59%)
सामान्य बारिश वाले जिले: आजमगढ़, गोंडा, हरदोई, कन्नौज, आगरा, बदायूं, फिरोजाबाद हाथरस, कासगंज, ललितपुर, मथुरा, मेरठ और मुरादाबाद।
किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
जुलाई खरीफ फसलों की बुवाई का सबसे अहम महीना माना जाता है। धान, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलें मानसूनी बारिश पर काफी निर्भर करती हैं। जिन जिलों में लगातार वर्षा की कमी बनी हुई है वहां खेतों में नमी की कमी और बुवाई में देरी की आशंका बढ़ सकती है। अगर आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां तेज नहीं होतीं तो कृषि क्षेत्र के साथ-साथ पेयजल और सिंचाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
आगे कैसा रहेगा यूपी का मौसम?
मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों में पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में तेजी आ सकती है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। ऐसे में जिन जिलों में अभी तक बारिश कम हुई है वहां अगले कुछ दिनों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।