UPSC success story: हर साल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का जब रिजल्ट आता है, तो इस परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों की कहानियां सुनाई जाती हैं। ये देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल पूरे देश से तकरीबन 100000 लाख उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। प्री, मेन और इंटरव्यू की तीन चरणों की प्रक्रिया से गुजरने के बाद कोई उम्मीदवार देश के सबसे प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचता है। जी-तोड़ मेहनत के बाद ये उम्मीदवार आईएएस, आईपीएस, आईएफएस जैसी ऑल इंडिया सर्विसेज में चुने जाते हैं।
यूं तो हर सफल उम्मीदवार की कहानी आने वाली नस्ल को प्रेरणा देती है। लेकिन कुछ कहानियां ऐसी भी होती हैं, जो रौंगटे खड़े कर देती हैं। ऐसी ही कहानी है केरल के श्रीनाथ के. की। श्रीनाथ ने केरल के मुन्नार के रेलवे स्टेशन पर दिन में कुली का काम करते हुए यूपीएससी परीक्षा पास की और अपनी सफलता का परचम लहराया। उनकी सफलता की कहानी एक बार फिर से ये याद दिलाती है कि हालात किस्मत तय नहीं करते, पक्का इरादा तय करता है।
मुन्नार में जन्मे श्रीनाथ को पैसे की तंगी की वजह से हाईस्कूल के बाद आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। परिवार के गुजारे के लिए, उन्होंने एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन पर कुली का काम शुरू किया। इस काम में शारीरिक रूप से बहुत मेहनत लगती थी और उम्मीदों के लिए बहुत कम जगह बचती थी। इतने मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने एक बेहतर भविष्य का सपना देखने की हिम्मत की।
श्रीनाथ के सफर की सबसे खास बात ये है कि उन्होंने अपने संसाधनों का कितनी बखूबी इस्तेमाल किया और सफल होकर निकले। महंगी कोचिंग या पढ़ाई का सामान न होने के कारण, उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए रेलवे स्टेशन पर मिलने वाले फ्री Wi-Fi पर बहुत ज्यादा भरोसा किया। पढ़ाई से संबंधित चीजें डाउनलोड करने से लेकर ऑनलाइन लेक्चर देखने तक, उन्होंने एक पब्लिक यूटिलिटी को अपनी पर्सनल क्लासरूम में बदल दिया। इससे यह साबित हुआ कि कभी-कभी संसाधनों से ज्यादा उसके इस्तेमाल का तरीका अधिक मायने रखता है।
27 साल की उम्र में श्रीनाथ अपने सपने को पूरा करने के लिए पहला कदम बढ़ाया। डिसिप्लिन और फोकस के साथ, उन्होंने साबित कर दिया कि अपनी कहानी को फिर से लिखने में कभी देर नहीं होती। आईएएस बनने से पहले, श्रीनाथ ने केरल पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित स्टेट-लेवल सिविल सर्विस एग्जाम पास किया। इस सफलता से उन्हें पैसों की तंगी से राहत मिली और आत्मविश्वास भी बढ़ा। यहीं उनके आईएएस के सपने को पूरा करने का पहला पड़ाव बन गया।