Holika Dahan 2025: किस दिन और किस मुहूर्त में करें होलिका दहन? जानें पूरी डिटेल

Holika Dahan 2025: होलिका दहन हिंदू धर्म में बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष 13 मार्च को होलिका दहन और 14 मार्च को रंगों का त्योहार होली मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसे शुभ मुहूर्त में करना आवश्यक होता है, क्योंकि भद्रा काल में किए गए कार्य अशुभ प्रभाव डाल सकते हैं। सही समय पर दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है

अपडेटेड Mar 06, 2025 पर 9:42 AM
Holika Dahan 2025: इस समय करें दहन, मिलेगी बुरी नजर और संकटों से मुक्ति

होलिका दहन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष 13 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा और अगले दिन, 14 मार्च को रंगों का त्योहार होली मनाई जाएगी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए सही मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक होता है, क्योंकि यदि इसे अशुभ समय यानी भद्रा काल में किया जाए, तो इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से होलिका दहन को भद्रा काल में करना वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे अनिष्टकारी परिणाम हो सकते हैं।

इस बार, भद्रा काल रात 11:26 बजे समाप्त होगा, जिसके बाद ही दहन करना शुभ रहेगा। इस पावन अवसर पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से नकारात्मक शक्तियां समाप्त होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। सही समय पर दहन कर इस शुभ पर्व का पूर्ण लाभ उठाएं।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त


इस वर्ष, होलिका दहन का शुभ समय एक घंटा चार मिनट का रहेगा। पंचांग के अनुसार, 13 मार्च की रात 10:35 बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू होगी, जबकि भद्रा काल रात 11:26 बजे समाप्त होगा। ऐसे में होलिका दहन का शुभ समय रात 11:26 बजे के बाद होगा। इस बार, शाम के समय भद्रा की छाया रहने के कारण सही मुहूर्त पर दहन करना आवश्यक होगा ताकि कोई अशुभ प्रभाव न पड़े।

भद्रा काल का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में किए गए कार्य शुभ फल नहीं देते और नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए, विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य इस समय में नहीं किए जाते। विशेष रूप से होलिका दहन को भद्रा काल में करना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इससे अनिष्टकारी प्रभाव पड़ सकता है।\शुभ मुहूर्त पर दहन करना ही उचित माना जाता है।

होलिका पूजन के लिए आवश्यक सामग्री

पूजा के दौरान इन सामग्री का उपयोग करना शुभ माना जाता है:

अक्षत, गंध, गुड़, फूल, माला, रोली और गुलाल

कच्चा सूत, हल्दी, जल से भरा लोटा और नारियल

बताशा, गेहूं की बालियां और मूंग आदि

सही विधि से पूजन करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

होलिका दहन का धार्मिक महत्व

होलिका दहन अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षसी होलिका ने भक्त प्रह्लाद को अग्नि में बैठाकर मारने का प्रयास किया था, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई। तभी से ये परंपरा चली आ रही है और हर साल होलिका दहन के रूप में मनाई जाती है।

पर्यावरण के प्रति जागरूकता

होलिका दहन करते समय पर्यावरण को ध्यान में रखना आवश्यक है। हानिकारक और ज्वलनशील पदार्थ जैसे डीजल, मोबिल, अलकतरा, पटाखे आदि का उपयोग करने से बचें। इसके बजाय, प्राकृतिक लकड़ियों और उपलों का उपयोग करें ताकि प्रदूषण न बढ़े और परंपरा भी बनी रहे।

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