Budget 2021: मुझे भरोसा है कि हम 2021-22 के विनिवेश लक्ष्य से आगे निकल जाएंगे - अनुराग ठाकुर

अनुराग ठाकुर ने कहा है कि 2025-26 के लिए फिस्कल डेफिसिट का टारगेट चुनौती भरा जरूर दिखता है, लेकिन मोदी सरकार का वित्तीय अनुशासन के मामले में एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड रहा है
अपडेटेड Feb 08, 2021 पर 09:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अरूप रॉयचौधरी


वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) इस बात को लेकर निश्चिंत हैं कि भले ही कुछ बजट टारगेट मुश्किल दिखाई देते हैं, लेकिन ये सभी हासिल किए जाने लायक हैं। बजट केबाद मनीकंट्रोल को दिए एक खास इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि 2021-22 के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य न केवल हासिल कर लिया जाएगा, बल्कि यह टारगेट से आगे निकल जाएगा।


उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि, 2025-26 तक के लिए मीडियम-टर्म फिस्कल लक्ष्य ऊंचे दिखाई देते हैं, लेकिन मोदी सरकार का वित्तीय अनुशासन को लेकर एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने कहा, “हमें वित्तीय समझदारी के लिए जाना जाता है। 2013-14 में वित्तीय घाटा 5.6 फीसदी था, जिसे हम पांच साल में घटाकर 3.4 फीसदी पर ले आए हैं।”


हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर ने ये भी कहा कि सरकार देश के वित्तीय तंत्र की साफ-सफाई को लेकर प्रतिबद्ध है और बैड बैंक बनाने का फैसला इसी दिशा में उठाया गया हालिया कदम है।


पेश हैं इस इंटरव्यू के अंशः


हम बजट की मुख्य थीम के साथ शुरुआत करेंगे, जिसमें नई नौकरियां पैदा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, फिस्कल एक्सपैंशन और निजीकरण पर जोर दिया गया है। निजीकरण की अगर बात करें तो हमने विनिवेश के लक्ष्यों का ये इतिहास देखा है अक्सर ये टारगेट चूक जाते हैं। आने वाला साल इस लिहाज से कैसे अलग होगा?


अगर आप गुजरे आठ महीनों में भारतीय बाजार में आए एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) पर नजर डालें तो पाएंगे कि अप्रैल से अक्तूबर तक यह करीब 48 अरब डॉलर रहा है।


मुझे उम्मीद है कि कोविड-19 की वजह से हुई देरी के बाद अब हम भारत पेट्रोलियम, एयर इंडिया, कॉनकोर और अन्य कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की अपनी योजना को पूरा कर पाएंगे। इनके अलावा, हम दो सरकारी बैंकों और एक बीमा कंपनी का भी निजीकरण करेंगे।


मुझे पूरा भरोसा है कि हम न सिर्फ 1.75 लाख करोड़ रुपये का टारगेट हासिल करेंगे, बल्कि हम इससे ज्यादा पर पहुंच जाएंगे। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि हम इस टारेगेट से आगे निकल जाएंगे।


सरकार ने नौकरियां पैदा करने के लिए बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने की बात की है। क्या सरकार के दिमाग में ऐसा कोई आंकड़ा है कि इतनी नौकरियां इससे पैदा हो सकती हैं? जो लोग ये कह रहे हैं कि लोगों को नकदी देना भी जरूरी है, उस पर आपका क्या कहना है?


एक कहावत है कि आप एक ही काम कर सकते हैं - या तो आप किसी शख्स को प्लेट में मछली परोस सकते हैं या फिर उसे मछली पकड़ना सिखा सकते हैं।


कहने का मतलब ये है कि सरकार ने खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर पर पैसे खर्च करने का रास्ता अख्तियार किया है। हम साल-दर-साल आधार पर कैपिटल एक्सपेंडिचर में 34.5 फीसदी ज्यादा खर्च करने जा रहे हैं। चाहे हेल्थकेयर हो, सड़कें, रेल या जल जीवन मिशन जैसे दूसरे सोशल सेक्टर के प्रोग्राम हों, इन सब पर सरकार पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने जा रही है।


इससे लोगों को ज्यादा नौकरियां हासिल करने में मदद मिलेगी और उनके हाथ में ज्यादा पैसे आएंगे। साथ ही इससे उनकी खर्च करने की ताकत भी बढ़ेगी जिससे अर्थव्यवस्था में रफ्तार आएगी। इसके अलावा अगर आप पीएम किसान या मनरेगा के लिए ज्यादा आवंटन जैसी किसानों को नकदी देने की स्कीमों पर नजर डालेंगे तो साफतौर पर इनमें एक संतुलन पैदा किया गया है।


एक तरफ, आप कैपिटल एक्सपेंडिचर में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं और दूसरी ओर आपके पास ये स्कीमें हैं जिनके जरिए आप लोगों को नकद पैसा मुहैया करा रहे हैं।


इनके अलावा, सभी मंत्रालयों में चल रही एससी/एसटी स्कीमों के लिए आवंटन में तकरीबन 52 फीसदी का इजाफा किया गया है।


हमारा मकसद कैपिटल एक्सपेंडिचर और समाज के कमजोर तबकों की देखरेख के बीच एक संतुलन बैठाना है।


मैं फिलहाल आपको ये आंकड़ा नहीं दे सकता कि कितनी नौकरियां पैदा होंगी, लेकिन ये निश्चित है कि ये कैपिटल एक्सपेंडिचर के ढाई गुना जितनी होंगी। इसका सीधा जमीनी असर होगा क्योंकि भारत को एक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। इससे और नौकरियां पैदा होंगी।


ऐसी चिंताएं जताई जा रही हैं कि कोविड-19 के वैक्सीनेशन के लिए आवंटित किया गया 35,000 करोड़ रुपये का फंड पर्याप्त नहीं है।


प्रधानमंत्री यह स्पष्ट कर चुके हैं कि कोविड-19 से जंग के लिए भारत किसी भी हद तक जाएगा और अब तक भारत इसमें बेहद सफल रहा है। हम दो मेक इन इंडिया वैक्सीन ला चुके हैं और अब दुनिया के 100 से ज्यादा देशों को इतने कम वक्त में इसकी सप्लाई भी कर रहे हैं।


यह भारत को आत्मनिर्भर बनाने और साथ में कोविड से लड़ाई लड़ने का मामला है। शुरुआत में पिछले साल हमने कोविड का सामना करने के लिए पीपीई किट्स, मास्क, वेंटिलेटर्स और दूसरे आइटमों के लिए 15,000 करोड़ रुपये मुहैया कराए थे। हमने कोविड योद्धाओं को 50 लाख रुपये का बीमा भी दिया था। अब चूंकि वैक्सीन आ गई है, ऐसे में हमने इसके लिए 35,000 करोड़ रुपये दिए हैं।


इसके अलावा, वित्त मंत्री ने यह भी साफ किया है कि अगर इसके अतिरिक्त पैसों की भी जरूरत होगी तो वह भी मुहैया कराए जाएंगे।


ऐसे में मुझे लगता है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। पहले लोगों को चीजें देखनी चाहिए उसके बाद ही टिप्पणी करनी चाहिए।


कई लोगों ने गुजरे वक्त में टिप्पणी की थी कि कोविड महामारी से भारत में करोड़ों लोगों की मौत होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हमने इसे बेहद संवेदनशीलता और अच्छे तरीके से संभाला है।


2020-21 में 9.5 फीसदी के संशोधित फिस्कल डेफिसिट के साथ आप 2025-26 में इसे घटाकर 4.5 फीसदी पर लाना चाहते हैं। क्या ये बेहद मुश्किल टारगेट नहीं है?


मैं केवल इतना कहूंगा कि जब 2014 में हमने सत्ता संभाली थी तब भारत दुनिया की सबसे गड़बड़ाती हुई पांच अर्थव्यवस्थाओं में था। वहां से अगले पांच साल के लिए हमने सात फीसदी ग्रोथ हासिल की है।


यहां तक कि आईएमएफ और दूसरे अन्य संस्थान भी 2021-22 के लिए भारत की ग्रोथ 11.5 फीसदी के करीब रहने की बात कह रहे हैं।


मुझे उम्मीद है कि हम यह ग्रोथ हासिल कर लेंगे और हो सकता है कि हम इससे भी बेहतर रहें।


जहां तक फिस्कल डेफिसिट की बात है, हमें फिस्कल प्रूडेंस (वित्तीय समझदारी) के लिए जाना जाता है। 2013-14 में फिस्कल डेफिसिट 5.6 फीसदी था, जिसे हम पांच वर्षों में घटाकर 3.4 फीसदी पर लाने में सफल रहे हैं।


कोविड की वजह से सभी अर्थव्यवस्थाओं को धक्का लगा है। अब हमने फिस्कल प्रूडेंस के लिए एक नया रास्ता तय किया है और हम इसे हासिल कर लेंगे।


वित्त मंत्री ने बैड बैंक तैयार करने ऐलान किया है। ऐसे वक्त में जबकि हम 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स देख रहे हैं, क्या ये बैंक पर्याप्त साबित होगा?


हमें अलग-अलग सेक्टरों से इस बाबत कई सुझाव मिले थे कि एक बैड बैंक जरूरी है।


जब हम सत्ता में आए थे तो हमने एक गहन एसेट क्वॉलिटी रिव्यू 2015-16 में कराया था। इसके बाद हमने कैपिटल इनफ्यूजन के तौर पर बैंकिंग सिस्टम में करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये डाले।


अभी भी हमने बैंकों में डालने के लिए 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। हमारी सोच साफ है कि हम अपने बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करना चाहते हैं।


बैड बैंक एक अच्छा आइडिया है या नहीं, ये चीज भविष्य में छिपी है, लेकिन ये बात तय है कि हम इस पर आगे बढ़ रहे हैं।


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।