भीषण गर्मी में कोल्ड ड्रिंक और बीयर की होगी किल्लत! इस कारण कंपनियों को नहीं मिल पा रहा कैन

गर्मियों का प्रकोप जिस तरह बढ़ रहा है, उसी हिसाब से कोल्ड ड़्रिंक्स और बीयर जैसे बेवरेजेज की मांग भी बढ़ रही है लेकिन कंपनियां कैन्स की किल्लत से जूझ रही हैं। जानिए चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलुमिनियम प्रोड्यूसर होने के बावजूद भारत में कैन की कमी क्यों हो रही है और इससे निपटने के लिए कंपनियां क्या कर रही हैं

अपडेटेड May 28, 2026 पर 12:21 PM
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मार्केट रिसर्च फर्म IMARC Group के मुताबिक भारत में एल्युमिनियम कैन्स की मांग 4478 करोड़ यूनिट तक पहुंच चुकी है और हर साल लगभग 5% की रफ्तार से बढ़ रही है। (File Photo- Pexels)

भीषण गर्मी के बीच कोल्ड ड्रिंक्स और बीयर की मांग बढ़ने से इन्हें बनाने वाली कंपनियां अब एलुमिनियम कैन की कमी से जूझ रही हैं। देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के कारण गर्मियों में ठंडे ड्रिंक्स और बीयर की बिक्री तेज हो गई है, लेकिन कैन शीट्स की कमी ने कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस कमी के कारण कुछ कंपनियों को उत्पादन घटाना पड़ रही है तो कई कंपनियां अब पीईटी और ग्लास बोतलों का अधिक इस्तेमाल कर रही हैं। साथ ही मांग पूरी करने के लिए ये अन्य विकल्प भी तलाश रही हैं।

इस कारण हो रही कैन्स की किल्लत

यह स्थिति तो तब है, जब चीन के बाद भारत में सबसे अधिक एलुमिनियम तैयार होता है लेकिन दिक्कत ये है कि देश में कैन शीट्स जैसे प्रोसेस्ड एलुमिनियम प्रोडक्ट्स पर्याप्त नहीं बनते हैं। इंडस्ट्री एग्जेक्यूटिव्स का कहना है कि इस साल समस्या ज्यादा गंभीर हो गई है क्योंकि भारत अधिकतर एलुमिनियम कैन शीट्स बाहर से मंगाता है। इसका एक बड़ा हिस्सा यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों से आता है। चूंकि ईरान और अमेरिका के बीच चल रही लड़ाई ने पश्चिमी एशिया में तनाव बढ़ाया है और शिपिंग को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे सप्लाई पर और दबाव पड़ा है। इंडस्ट्री एग्जेक्यूटिव्स का कहना है कि स्थिति तो पहले से ही खराब थी, पश्चिमी एशिया में तनाव से स्थिति और गंभीर हुई है। इससे पहले BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) की जरूरतों से जुड़ी आयात देरी ने इस साल 2026 की शुरुआत से ही सप्लाई पर असर डाला था।


क्या है भारतीय कंपनियों की तैयारी

घरेलू कंपनियां कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं। पिछले साल 2025 में बॉल कॉरपोरेशन (Ball Corporation) की भारतीय इकाई ने आंध्र प्रदेश के श्री सिटी स्थित अपने प्लांट में $6 करोड़ में विस्तार का ऐलान किया था ताकि कैन बनाने की क्षमता बढ़ाई जा सके। इसके अलावा एलुमिनियम बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी हिंडाल्को भी ओडिशा के संबलपुर में स्थित आदित्य प्लांट में कैन शीट प्रोडक्शन बढ़ा रही है जिससे इसकी क्षमता करीब 50 किलो टन और बढ़ जाएगी। हिंडाल्को के सीएमडी सतीश पई के मुताबिक अतिरिक्त सप्लाई आने के बाद मौजूदा कमी समय के साथ खत्म हो जाएगी।

इस कारण बढ़ रही कैन्स की मांग

कैन की मांग इसलिए बढ़ रही है क्योंकि बेवरेज कंपनियां प्रीमियम और लो-शुगर ड्रिंक्स अधिक बेच रही हैं, जिनमें से कई कैन में बेचे जाते हैं। बीयर कंपनियां भी खासतौर से मिड-प्राइस और मास-मार्केट ब्रांड्स के लिए कैन्स का अधिक इस्तेमाल कर रही हैं। इसके अलावा चूंकि एलुमिनियम रिसाइकिल हो जाता है तो लोग इसे अधिक पसंद कर रहे हैं। मार्केट रिसर्च फर्म IMARC Group के मुताबिक भारत में एल्युमिनियम कैन्स की मांग 4478 करोड़ यूनिट तक पहुंच चुकी है और हर साल लगभग 5% की रफ्तार से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ग्राहकों की बदलती पसंद और बेवरेज की खपत में उछाल के चलते यह मार्केट 2034 तक करीब 6800 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकता है।

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