भारतपे (BharatPe) ने शुक्रवार को एक बयान जारी बोर्ड के सदस्यों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की आलोचना की। कंपनी ने कहा कि बोर्ड ने हमेशा उचित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कंपनी के हित में फैसला लिया है। साथ ही बोर्ड ने यह भी कहा कि उसे अभी तक कंपनी के कामकाज से जुड़े अंतरिम गवर्नेंस रिपोर्ट नहीं मिली है।
BharatPe ने यह बयान ऐसे समय में जारी जब कंपनी के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) ने मनीकंट्रोल के साथ एक बातचीत में आरोप लगाया कि बोर्ड उन्हें जबरदस्ती कंपनी से बाहर निकालना चाहता है।
भारतपे ने अपने बयान में कहा, "हमें गहरा दुख है कि भारतपे के बोर्ड या बोर्ड के इंडीविजुअल सदस्यों की ईमानदारी और निष्ठा पर लगातार गलत तथ्यों और निराधार आरोपों के जरिए सवाल उठाया जा रहा है। बोर्ड ने कंपनी के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर किए अपने सभी कार्यों में उचित प्रक्रिया का पालन किया है।"
अशनीर ग्रोवर ने भारतपे के सीईओ सुहैल समीर पर भी आरोप लगाया है कि वह निवेशकों के साथ मिलकर उन्हें कंपनी से बाहर करना चाहते हैं।
ग्रोवर से जुड़ा विवाद शुरू होने के बाद यह उनके और कंपनी के बोर्ड के बीच मतभेद इतने खुलकर और स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। यह मतभेद ऐसे समय में बाहर आया है, जब कंपनी के कामकाज और कारोबारी तरीकों को लेकर जांत बढ़ती जा रही है। साथ ही पिछले हफ्ते सूत्रों के जरिए बाहर आई उस खबर की भी पुष्टि करता है, जिसमें कहा गया था कि बोर्ड ग्रोवर को वापस कंपनी में लेने को लेकर इच्छुक नहीं है।
अशनीर ग्रोवर और उनकी पत्नी माधुरी जैन का पिछले महीने एक कथित ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें अशनीर कथित रूप से कोटक के एक कर्मचारी के साथ अभद्र भाषा में बात करते हुए सुने जा रहे थे। इसके बाद शुरू हुए विवाद के बाद कंपनी में जहरीली संस्कृति और कामकाज के तरीके को लेकर आंतरिक जांच शुरू हुई और दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया। BharatPe का बोर्ड और बाहरी सलाहकार कंपनी के कामकाज की फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं, जिसमें अकाउंटिंग, अप्रूवल प्रोसेस, खर्च और हायरिंग शामिल हैं।
ग्रोवर ने शुक्रवार को कहा कि उनकी डिमांड है कि उन्हें फिर से कंपनी में वापस लाया जाए। अगर यह मुमिकन नहीं है तो उन्हें 4000 करोड़ रुपये दिया जाए। तभी वह कंपनी से बाहर जाएंगे। दरअसल, यह कंपनी में उनकी हिस्सेदारी का मूल्य है। कंपनी में उनकी करीब 9 फीसदी हिस्सेदारी है।