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बजट से पता चलेगा आगे का रोडमैप

सबकी नजरें रहेंगी कि बजट में क्या संकेत मिल रहे हैं, आगे का क्या रोडमैप है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 09, 2014 पर 7:03 PM
बजट से पता चलेगा आगे का रोडमैप

संतोष नायर, एडिटर, मनीकंट्रोल डॉट कॉम

ये साल का वो वक्त है जब वित्त मंत्री देश के सबसे अहम व्यक्ति होते हैं। चाहे गृहणियां हों या वेतनभोगी, वरिष्ठ नागरिक, छोटे कारोबारी या उद्योगपति सबको बजट से उम्मीदें होती हैं, जिन्हें पूरा करना सिर्फ वित्त मंत्री के हाथ में होता है। इस बार अरुण जेटली के सामने उनका अपना और मोदी सरकार का पहला बजट बनाते कई पेचीदा सवाल होंगे। उनकी सबसे बड़ी मुश्किल है देश की अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत। लेकिन, अच्छी खबर ये है कि पहले से ही बजट से लोगों को काफी कम उम्मीदें हैं क्योंकि सबको चुनौतियों के बारे में अंदाजा है। इसे देखते हुए सरकार की छोटी नीतियों पर ध्यान नहीं होगा। सबकी नजरें रहेंगी कि बजट में क्या संकेत मिल रहे हैं, आगे का क्या रोडमैप है? इनसे पता चलेगा कि सरकार कितनी जल्दी अर्थव्यवस्था की कुछ दिक्कतों को दूर कर पाएगी। जैसे मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में जान फूंकने और रोजगार के मौके बढ़ाने के लिए दूरगामी योजना की जरूरत होगी और इसका असर दिखाई देने में वक्त लगेगा। वित्त मंत्री के पास टैक्स कम करने की गुंजाइश कम है, लेकिन वो राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स में बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे। वहीं, पिछली सरकार के बकाए सब्सिडी का भी बड़ा मुद्दा है और कई लोगों का मानना है कि वित्तीय घाटे को लक्ष्य पर लाने के लिए पी चिदंबरम ने सब्सिडी टली। पूर्ववर्ती सरकार के पिछले कारोबारी साल के सब्सिडी भुगतान को इस वित्त वर्ष तक टालने के इस फैसले की निंदा करने वालों में एचडीएफसी चेयरमैन दीपक पारेख शामिल हैं। इस पर पूर्व वित्त मंत्री ने सफाई दी है कि चौथी तिमाही का सब्सिडी भुगतान अगले कारोबारी साल की पहली तिमाही में ही किया जाता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बकाया सब्सिडी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली पहले ही अपने फेसबुक पेज पर संकेत दे चुके हैं कि उनके बजट में जोर वित्तीय अनुशासन पर होगा।

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