पहली फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार इक्विटी मार्केट से जुड़े टैक्स में बड़े फेरबदल की तैयारी में है। सीएनबीसी-आवाज़ ने सबसे पहले 10 अक्टूबर को ही ये खबर आप तक पहुंचाई थी। अब हमें एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि इस फेरबदल में DDT यानी डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स हटाने का ऐलान हो सकता है। साथ ही डिविडेंड पर 20 फीसदी का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिल सकता है। लेकिन लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स पूरी तरह हटने के आसार कम हैं। बजट में छोटे शेयरहोल्डर्स को राहत मिल सकती है। लेकिन बड़े शेयरहोल्डर्स को झटका मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक बजट में DDT को पूरी तरह हटाने का ऐलान किया जा सकता है। डिविडेंड पाने वाले पर टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी आ सकती है। डिविडेंड को कुल आमदनी का हिस्सा माना जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक डिविडेंड पर इनकम टैक्स की दरें लागू हो सकती हैं। डिविडेंड पर 20 फीसदी का स्टैंडर्ड डिडक्शऩ मिल सकता है। वहीं, निचले स्लैब में आने वालों को कम टैक्स चुकाना पड़ सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 30 फीसदी के स्लैब वालों को डिविडेंड पर ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ सकता है। अभी टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी कंपनी पर होती है जो डिविडेंड देती है। अभी 20.55 फीसदी DDT लगता है जिसमें सरचार्ज और एजुकेशन सेस शामिल होता है।
सूत्रों के मुताबिक 10 लाख से ज्यादा डिविडेंड पाने वालों पर अलग से टैक्स नहीं लगाने का प्रस्ताव है। अभी 10 लाख से ज्यादा डिविडेंड पाने वालों पर 10 फीसदी टैक्स लगता है। LTCG टैक्स हटाने की संभावना कम है। बल्कि LTCG टैक्स में राहत की संभावना ज्यादा है। अब एक साल की बजाय 2 साल बाद LTCG टैक्स का प्रावधान मुमकिन है। सरकार LTCG के मामले में इक्विटी मार्केट औऱ दूसरे निवेश में अंतर नहीं करना चाहती है। LTCG टैक्स के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के साथ वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक डायरेक्ट टैक्स पर टास्क फोर्स ने भी अपनी सिफारिश में LTCG टैक्स हटाने की सिफारिश नहीं की थी।