1 फरवरी को फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी। इसके लिए 20 जनवरी को हलवा की रस्म निभाई जाएगी। इसके बाद बजट के प्रिटिंग का काम औपचारिक रूप से शुरु हो जाता है। हलवा के इस रस्म में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण समेत कई मंत्री और वित्त मंत्रालय के अधिकारी शामिल रहेंगे।
हलवा बनाने की रस्म काफी पहले से ही चली आ रही है। इसके पीछे कारण यह है कि हलवे को काफी शुभ माना जाता है और शुभ काम की शुरुआत भी मीठे से की जाती है।
आमतौर पर हलवा बनाने की रस्म में बजट बनाने वाले अधिकारी ही शामिल होते हैं। हलवा बनने के बाद से मंत्रालय के 50 से अधिक लोग बजट बनाने में लग जाते हैं। बजट पेश होने के एक हफ्ते पहले से ही इन लोगों को 24 घंटे नॉर्थ ब्लॉक में ही गुजारना होता है।
इस बार हलवा सेरेमनी बजट से 10 दिन पहले हो रही है। बजट बनाने में शामिल लोग घर-परिवार, दुनिया से दूर हो जाते हैं। अमूमन यह काम वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में होता है। पिछले कई सालों से बजट छापने का काम यही होता है। इसलिए बेसमेंट की सुरक्षा सीमा की सुरक्षा जैसी दिखने लगती है। वर्ष 1980 से नार्थ ब्लाक के बेसमेंट में बजट छापने का काम किया जा रहा है।
बजट के सभी डॉक्युमेंट्स चुनिंदा अधिकारी ही तैयार करते हैं। इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सभी कंप्यूटर्स को दूसरे नेटवर्क से डीलिंक कर दिया जाता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बजट छपाई का अनुभव ले चुके वित्त मंत्रालय के एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि संसद में बजट भाषण शुरू होते ही यहां कैद कर्मचारी बैग लेकर तैयार हो जाते हैं। बजट भाषण खत्म होते ही इन्हें मंत्रालय से बाहर जाने की इजाजत मिल जाती है। फिर ये नहीं रूकते। छपाई के अंतिम चार-पांच दिन तो इन्हें घर से भी संपर्क की इजाजत नहीं होती। इनके घर में कोई इमरजेंसी हो जाए तो उन्हें मंत्रालय के लैंडलाइन पर फोन करने की इजाजत होती है। लेकिन बातचीत निगरानी में होती है। उस बात की रिकॉर्डिंग तक की जाती है।
सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।
