देश में ऑटो सेक्टर में तकरीबन एक साल से ब्रेक लगा हुआ है। अब इसमें ऑटो सेक्टर दिग्गज ब्रेक हटाकर स्पीड चाहते हैं। लिहाजा ऑटो सेक्टर को बजट 2020 से बड़ी उम्मीदें है।

ऑटो सेक्टर में साल 2019 में वाहनों की बिक्री दो दशक में सबसे कम रही। जबकि ऑटो सेक्टर का देश की GDP में 7.1 फीसदी मैन्युफैक्चरिंग GDP में 49 फीसदी योगदान है। GST कलेक्शन में 15 फीसदी योगदान है। इसके बावजूद ऑटो सेक्टर पिछले एक साल से मंदी से जूझ रहा है। 

इंडस्ट्री की मांग

ऑटो इंडस्ट्री ने सरकार से मांग की है कि इस सेक्टर को मंदी से बाहर निकालने के लिए ठोस फाइनेंशियल कदम उठाए जाएं। साथ ही आटो सेक्टर ने मांग की है कि GST दरों में कटौती की जाए। इसे 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने की मांग की है। हालांकि यह सीधा बजट से जुड़ा मसला नहीं है क्योंकि GST रेट तय करने का फैसला GST काउंसिल करती है।

इसके साथ ही इंडस्ट्री ने मांग की है कि लिथियम बैटरी पर इम्पोर्ट ड्यूटी खत्म की जाए। जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा इंडस्ट्री के लोग चाहते हैं कि प्रोत्साहन के लिए स्क्रैप पॉलिसी लाई जाए और वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन चार्ज में भारी बढ़त की जाए ताकि पुराने वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित किया जा सके।

ऑटो लोन पर भी चुकाए जाने वाले ब्याज के बदले इनकम टैक्स में छूट मिले। BS-6 उत्सर्जन मानक प्रदूषण घटाने की दिशा में अच्छा कदम है। लेकिन इससे वाहनों की लागत 8-10% बढ़ जाएगी। इससे सरकार का GST कलेक्शन भी बढ़ जाएगा।

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