वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने पिछले साल बजट में स्टार्टअप्स के लिए कई बड़े एलान किए थे। इसमें नए इंक्यूबेटर्स बनाने के साथ ही कुछ टैक्स रियायतें और स्टार्टअप्स को सरकार की तरफ से बढ़ावा देने की बात कही गई थी। बीते एक साल में स्टार्टअप्स निवेश के लिए बड़ी पसंद रहे हैं। खास तौर पर विदेशी निवेश इस इकोसिस्टम को और मजबूत करने में मदद कर रहा है। रेगुलेटरी बदलावों के जरिए भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार हो रहे हैं और वहीं आंत्रेप्रेन्योर्स की मदद के लिए सरकार कई प्रोग्राम भी चला रही है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ टैक्स की दिक्कतें अब भी बाकी हैं, तो इकोनॉमी में सुस्त पड़ी चाल भी स्टार्टअप्स की ग्रोथ में अड़चन बन रहे हैं। स्टार्टअप्स और एंजल इन्वेस्टर्स की इस बजट से क्या उम्मीदे हैं और क्या डिमांड्स हैं, यही हम आज की इस खास चर्चा में जानेंगे।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बजट में अगले वित्त वर्ष के लिए स्टार्टअप्स के लिए 2,000 Cr देने का एलान संभव है। फंड ऑफ फंड्स के तहत ये प्रावधान किया जा सकता है। सरकार फंड ऑफ फंड्स के तहत 10,000 Cr की मंजूरी दे चुकी है। उद्योग मंत्रालय अगले 1 साल के लिए 2,000 Cr का फंड चाहता है। बजट में अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंड के जरिए स्टार्टअप्स में फंडिंग आसान की जा सकती है। यूनिवर्सिटी से मिलने वाले फंड का दायरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा पेंशन और इंश्योरेंस फंड की शर्तें भी आसान की जा सकती हैं। GeM पोर्टल से स्टार्टअप्स से 5Lk का सामान खरीदना जरूरी बनाया जा सकता है। फिलहाल GeM पोर्टल से सामान खरीदने के लिए 25,000 रुपये की सीमा है।
अब नजर डाल लेते हैं बजट से स्टार्टअप्स की उम्मीदों पर
टैक्स से जुड़ी मांगें
- LTCG, GST और ESOP से जुड़ी दिक्कतें दूर हों
- स्टार्टअप में निवेश पर LTCG ज्यादा है
- सरकार ने इक्विटी के लिए सरचार्ज वापस लिया था
- स्टार्टअप्स में निवेश पर 28 फीसदी LTCG
- ESOP के तहत मिली इक्विटी की बिक्री पर ही टैक्स लगे
सेक्टर पर फोकस वाले फंड ऑफ फंड्स बनाने की मांग
- फिलहाल SIDBI के तहत फंड ऑफ फंड्स है
- कागजी कार्रवाई के लिए सिंगल विंडो बनाई जाए
- इकोनॉमी में कंजंप्शन बढ़ाने की जरूरत
- मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी पर हो फोकस
इन्वेस्टर्स की मांगे
- ESOP के नियमों को रिवाइज करने की जरूरत
- ESOP - Employee Stock Ownership Plan
- स्टार्टअप में निवेश पर टैक्स रियायत मिले
छोटे कारोबार को मिले मदद
- मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों में निवेश आसान हो
- MSME के लिए कर्ज सुविधा बढ़ाई जाए
- इकोनॉमी में रफ्तार आने पर सेगमेंट में सुधार आएगा
- बजट में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर जोर दिया जाए
- ई-कॉमर्स पॉलिसी पर सफाई की जरूरत
सोशल सेक्टर स्टार्टअप्स की डिमांड
- सोशल सेक्टर में काम कर रहे स्टार्टअप्स को ज्यादा छूट मिले
- फूड, एनर्जी, पानी, हेल्थ जैसे स्टार्टअप्स को बढ़ावा
- क्लीनटेक सेक्टर के लिए GST दर 18% से घटाने की मांग
- राज्य सरकारों के टेंडर में स्टार्टअप्स की हिस्सेदारी बढ़े
- बैंकों से कर्ज की प्रक्रिया आसान हो
- स्टार्टअप्स में निवेश पर LTCG टैक्स कम किया जाए
- टियर 2 और टियर 3 शहरों में इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित हों
- समाधान के लिए सिंगल विंडो बने
फिनटेक की डिमांड
- इनकम टैक्स घटाने और कंजंप्शन बढ़ाने पर फोकस हो
- ESOP का टैक्स स्ट्रक्चर बदला जाए
- डिजिटल KYC गाइडलाइंस में सफाई की जरूरत
- पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री बनाई जाए
- गोल्ड लोन के लिए किसान प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) में शामिल हों
- SARFAESI कानून के तहत NBFCs की सीमा घटाई जाए
- डिजिटल साइन एग्रिमेंट में स्टैंप ड्यूटी घटाई जाए
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