NPA से निपटने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में बैड बैंक की घोषणा की है। बैड बैंक कैसे  काम करेगा और इसकी क्या रुपरेखा होगी। इस पर Department of Financial Services के सेक्रेटरी देबाशीष पांडा ने सीएनबीसी-आवाज से बातचीत करते हुए कहा कि बड़े NPA अकाउंट के रिजॉल्यूशन के लिए Bad Bank का गठन होगा।

बैंक कंसोर्शियम की वजह से कंसॉलिडेशन की दिक्कतें आई है। उन्होंने आगे  कहा कि पहले भी IBA से  ARC, AMC मॉडल स्थापित करने का प्रस्ताव आया था। सरकारी, प्राइवेट बैंको को मिलाकर  ARC, AMC मॉडल बनाने का प्रपोजल  था। PSU, PVT. मिलकर एक RAC की स्थापना करेंगे। एक ARC सारे एसेट को एग्रिगेट करेगा।  ARC/AMC मॉडल में सरकारी, निजी बैंक शामिल होगें।  500 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन बैंक कंसोर्शियम देखता है। इन्वेस्टर को एसेट खरीदने दिक्कतें होती हैं।  Bad Bank से NPA रिजॉल्यूशन में आसानी होगी।

नए ARC मॉडल के तहत सभी NPA एक जगह लाए जाएगे। शुरुआत में 2-2.25 लाख करोड़ के NPA शामिल होंगे। बैंकों ने कई NPA अकाउंट की 80-90 फीसदी प्रोविजनिंग की है। NPA रिजॉल्यूशन से बैंक को पास अतरिक्त रकम आएगी। सरकार और RBI की तरफ से जल्द सभी मंजूरी संभव होगी।

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