अर्थव्यवस्था तेजी से ग्रोथ करे, इसके लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने देश का राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit) बढ़ने की चिंता छोड़ दी है। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए राजकोषीय घाटे (Fiscal deficit) का लक्ष्य GDP के 6.8% रखने का लक्ष्य तय किया है। वहीं, उन्होंने अपने बजट भाषण में इस बात को स्वीकार किया कि इस वित्त वर्ष देश का Fiscal deficit सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के 9.5% के बराबर रह सकता है। आपकतो बता दें कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 3.5 फीसदी रखा था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस वर्ष Fiscal deficit का भरपाई के लिए केंद्र सरकार को 80 हजार करोड़ की जरूरत होगी, जो अगले दो महीनों में सरकार बाजार से जुटाएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि देश की इकोनॉंमी को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार 2021-22 में 34.83 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसमें 5.4 लाख करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर पर खर्च होगा, जो पिछले साल से 34.5% अधिक है। इससे देश मे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और नई नौकरियां पैदा करने में मदद मिलेगी। आपको बता दें कि FRBM Act के तहत 2021-22 में फिस्कल डेफिसिट को 3% तक सीमित रखने की बात कही गई है।

12 लाख करोड़ रुपये तक मार्केट से कर्ज

वित्त मंत्री ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में सरकार की बाजार से कुल उधारी (gross borrowing) 12 लाख करोड़ तक होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2025-26 में Fiscal Deficit को GDP के 4.5% तक नियंत्रित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि फाइनेंस बिल के माध्यम से सरकार Contingency Fund of India का फंड 500 करोड़ से बढ़ाकर 30,000 करोड़ किया जाएगा। वहीं राज्यों द्वारा उधार लेने की सीमा को 4% तय किया गया है। हालांकि, इसमें 0.5% तक की बढ़ोतरी की जी सकती है।

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