कई वर्षों की देरी के बाद अंतत: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने  bad bank की स्थापना का ऐलान कर दिया। इस संस्था क गठन bad loan की समस्या से जुझ रहे बैंकों को राहत दिलाना है। bad bank एक एसेट रिकंस्ट्रशन कंपनी (ARC) मॉडल पर आधारित होगा। इस पर व्यापक विवरण का इंतजार है।

bad bank फाइनेशिंयल सिस्टम से डूब चुके कर्जों को निपटाने में अहम भूमिका अदा करेगा। इसपर काफी लंबे अरसे से चर्चा की जा रही थी। बैंक अपने bad loan को डिस्काउंट पर bad bank को ट्रांसफर कर सकेंगे। उसके बाद bad bank के एक्सपर्ट इन बुरे लोन के निपटाने के लिए प्रोफेशनल तरीके से कोशिश करेंगे जबकि बैंक नए सिरे से अपने नए कारोबार पर फोकस कर सकेंगे।

27 जनवरी को मनीकंट्रोल ने सूचित किया था कि इस बजट में bad bank का ऐलान हो सकता है। बता दें वर्तमान में बैंकों का  करीब 8 फीसदी लोन bad loan की श्रेणी में आ गया है यानी यह  90 दिनों से ज्यादा ओवरड्यू हो गया है।

bad bank क्या है?

बता दें कि bad bank का आइडिया कोई नया आइडिया नहीं है। 2018 में सरकार ने पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए Project Sashakt नाम के एक योजना का ऐलान किया था जिसके तहत सरकारी बैंकों के bad loan से निपटने के लिए 5 सूत्री  योजना तैयार की गई थी। उस  समय सरकार ने कहा था कि एसेट मैनजमेंट कंपनी के तर्ज पर एक संस्था का गठन किया जाएगा। जो बैंकों  के एसेट  टर्न अराउंड, जॉब क्रिएशन औऱ प्रोटेक्शन पर फोकस करेगा।

सरकार  ने यह भी कहा था कि इस नई कंपनी का गठन  Insolvency और Bankruptcy Code (IBC) प्रक्रिया औऱ IBC लॉ के तहत किया जाएगा। तब सरकार ने इसे bad bank का नाम नहीं दिया था और यह साफ किया था कि  यह bad loan की सफाए की प्रक्रिया संलग्न नहीं होगा बल्कि इस प्रक्रिया का संचालन बैंकों द्वारा ही जाएगा।

अब सरकार ने badbank की स्थापना का ऐलान किया है। सवाल यह है कि सरकार ने इस समय इसकी स्थापना का निर्णय क्यों लिया। इसके पीछे कुछ अहम कारण हैं।

कोविड के बाद एनपीए बढ़ने की संभावना

आरबीआई के मुताबिक bad loan की वर्तमान मात्रा बैंकों के लिए बड़ी चिंता बन गई है। सितबंर 2020 के समाप्ति पर बैंकिंग सिस्टम में ग्रॉस एनपीए पूरी इंडस्ट्री के लोन बुक का करीब 7.5 फीसदी था। इसके इस साल मार्च- सितबंर तक बढ़कर 13.5 फीसदी तक होने का अनुमान है।  bad loan के 13.5 फीसदी रहने का अनुमान बेस्ट केस सीनेरियो को ध्यान में रखकर लगाया गया है जबकि स्थित और बिगड़ने पर यह 15 फीसदी पर पहुंच सकता है। यह बैंकिंग सिस्टम के लिए बहुत  ही बड़ा झटका  होगा क्योंकि उनको  bad bank से निपटने के लिए बड़ी मात्रा पूंजी की जरुरत होगी। वर्तमान bad loan को एक अलग कंपनी को ट्रांसफर करने बैंकों को राहत मिल सकती है।

ये   bad loan लोन से निपटने का सबसे सस्ता विकल्प

bad bank बनाना bad bank की समस्या से निपटने का सबसे किफायती विकल्प है क्योंकि बैंकों के एनपीए के नेट वैल्यू में भारी गिरावट देखने को मिली है। इसके पहले bad bank नहीं बनाया गया इसकी वजह यह थी कि कुछ समय पहले बैंकों के नेट बुक वैल्यू बहुत ज्यादा थी जिसकी वजह से इन एसेट का ट्रांसफर काफी मंहगा पड़ता। आज की स्थिति  में बैंकों के एनपीए की नेटबुक वैल्यू काफी कम है तमाम मामलों में ये मुश्किल से  15 फीसदी है। इसके साथ ही बैंकों ने एनपीए से निपटने के लिए प्रोविजन भी कर रखें है। इस स्थिति में  bad bank  बनाना एक अच्छा विकल्प है।

कोविड-19 का झटका

बैंकों की पहले से  ही खराब बैलेंसशीट पर  कोरोना ने और चोट पहुंचाई है। इस महामारी ने देश में इकोनॉमी गतिविधि को बड़ा झटका दिया  है जिससे बैंकों का भी बड़ा दर्द बढ़ गया है। 6 महीने के लोन मोरेटोरियम ने कंपनी को अस्थाई राहत पहुंचाई है लेकिन इस अवधि के पूरा होने के बाद  बैंकों ने कुछ अकाउंट भी रीस्ट्रक्चरिंग की है। बैंकों की तरफ से अब तक उपलब्ध कराएगे आकंड़ों के मुताबिक कमजोर बैकों को  ज्यादा झटका लगा है। मिशाल के तौर पर देखें तो लगभग 1 तिहाई stressed के साथ करीब 5 फीसदी लोन बुक की रीस्ट्रक्टचरिंग की है। इंडस्ट्री जानकारों के मुताबिक कोविड महामारी के चलते लगभग 3 फीसदी लोन बुक के रीस्ट्रक्चरिंग देखने को मिल सकती है।

अगर bad bank बनने से बैंक नए लोन पर कर सकेंगे फोकस

जानकारों का मानना है कि अगर bad bank बन जाता  है तो खराब लोन का बड़ा हिस्सा bad bank को ट्रांसफर हो जाएगा। जिसके चलते बैंक नए सिरे से नई लैडिंग पर फोकस कर सकेंगे और अच्छी कंपनियों को लोन मिल सकेगा। इससे इकोनॉमी गतिविधियों को भी बूस्ट मिलेगा।

इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने bad bank बनाने का निर्णय लिया।


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