इस साल बजट 1 जनवरी को पेश होने वाला है। बजट के दिन वैसे तो सबकी नजर सरकार के फैसलों पर रहती है लेकिन बजट से पहले इससे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों पर गौर करते हैं। क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था जब किसी पहेली या क्रॉसवर्ड सुलझाने पर जो रकम मिलती थी उस पर टैक्स लगता था। भले ही यह रकम कितनी भी कम क्यों न हो। इस बजट की काफी आलोचना हुई थी। जानिए बजट के ऐसे ही दिलचस्प किस्से।
..जब उप प्रधानमंत्री ने पेश किया था बजट
1967-68 का बजट खास था क्योंकि यह बजट उप-प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने पेश किया था। ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी उप-प्रधानमंत्री ने बजट पेश किया था। लेकिन ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि मोरारजी देसाई ही फाइनेंस मिनिस्टर और उप-प्रधानमंत्री थे।
जब पति-पत्नी के आपसी लेनदेन पर भी लगा था टैक्स
साल 1968-69 का बजट आम आदमी पर भारी पड़ा था। इस बजट में स्पाउस अलाउंस खत्म कर दिया गया था। यानी अब पति अपनी पत्नी या पत्नी अपने पति को कोई रकम देगी तो उस पर टैक्स देना होगा। इससे पहले इस रकम पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था।
महंगी हुई थी इंपोर्टेड कार
लग्जरी पसंद करने वालों के लिए साल 1969-70 का बजट महंगा साबित हुआ था। इस बजट में इंपोर्टेड कारों पर टैक्स 60 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया था। सरकार का मकसद था कि जो लोग स्टेटस सिंबल के तौर पर महंगी कार खरीदते हैं उनपर टैक्स लगाया जाए।
पहली बार किसी महिला ने पेश किया था बजट
साल 1970-71 के बजट की खासियत है कि यह भारत का ऐसा पहला बजट है जिसे किसी महिला प्रधानमंत्री ने पेश किया हो। इसे इंदिरा गांधी ने पेश किया था, जो उस समय वित्त मंत्री भी थीं।
विदेश जाने पर भी लगा था टैक्स
साल 1971-72 के बजट में विदेश जाने वालों पर टैक्स लगाया था। दिलचस्प है कि इंडियन करेंसी में टिकट खरीदने पर कुल वैल्यू का 20 फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव किया गया था। विदेशी मुद्रा में टिकट खरीदने पर कोई टैक्स नहीं लगता था।
पहेली के इनाम पर भी लगाया गया था टैक्स
साल 1972-73 के बजट की काफी आलोचना की गई थी। इसमें पहली बार क्रॉसवर्ड सुलझाकर जीती गई रकम पर 34.5 फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव किया गया था।
गैर कृषि आमदनी पर लगा था टैक्स
पहली बार 1973-74 के बजट में अमीर किसानों की गैर-कृषि आमदनी पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव पेश किया गया था।
इनकम टैक्स का स्ट्रक्चर सुधरा
साल 1974-75 के बजट में इनकम टैक्स स्ट्रक्चर को सुधारने की दिशा में काम किया गया था। इसमें इनकम टैक्स के मैक्सिमम मार्जिनल रेट को 97.75 फीसदी से घटाकर 75 फीसदी किया गया था।
पहली बार दिया गया इंसेंटिव
साल 1975-76 के बजट में सरकारी कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए इंसेंटिव देने का ऐलान किया गया था ताकि वे अपने PF फंड से बार-बार पैसे ना निकालें।
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