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बजट का सफर: जानिए कब 72.5% इनकम टैक्स चुकाना पड़ता था

बजट के सफर में आज हम कुछ दिलचस्प फैक्ट पेश कर रहे हैं जिनपर भरोसा करना मुश्किल होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 08, 2021 पर 7:10 PM
बजट का सफर: जानिए कब 72.5% इनकम टैक्स चुकाना पड़ता था

हर साल जब बजट पेश किया जाता है तो आम आदमी को सबसे ज्यादा इस बात का इंतजार होता है कि टैक्स में क्या बदलाव किए जाएंगे। क्या सरकार टैक्स छूट देगी? लेकिन बजट के इतिहास में एक दौर ऐसा भी था जब आमदनी पर 70 फीसदी से ज्यादा इनकम टैक्स लगता था। जी हां, ऐसे ही कुछ दिलचस्प फैक्ट यहां पेश किए जा रहे हैं।

पहली बार संपत्ति कर लगा

साल 1957-58 के बजट में संपत्ति कर के तौर पर एक नया डायरेक्ट टैक्स शुरू किया गया, जो 60 साल बाद भी चल रहा है।

जानिए कब लगा उपहार टैक्स

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने साल 1958-59 के बजट में पहली और आखिरी बार खुद बजट पेश किया था। नेहरू ने अपने बजट में उपहार कर  लगाया था जो पश्चिमी देशों में लोकप्रिय था।

बजट पेश करने का तरीका बदला

आज जिस तरह की बजट की एकाउंटिंग होती है उसकी शुरुआत साल 1959-60 के बजट में की गई थी। तब पहली बार बजट अनुमान पेश किया गया। इसके साथ ही योजनागत और गैर योजनागत खर्च के नाम से दो हिस्से तय किए गए थे।

अमेरिकी सरकार के साथ हुआ था करार

साल 1960-61 के बजट में अमेरिकी शासन के साथ PL 480 यानी फूड फॉर पीस का करार हुआ था. इसके तहत 1959 में भारत ने अमेरिका से अनाज आयात करने का करार किया था। उस वक्त इस योजना पर 122 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। हालांकि यह करार विवादों में घिर गया था।

बजट में रिफाइनरी बनाने का हुआ था ऐलान

साल 1961-62 के बजट में सोवियत संघ सरकार की आर्थिक मदद से एक तेल रिफाइनरी स्थापित करने की घोषणा की थी।

जब इनकम टैक्स बढ़कर 70 फीसदी से ज्यादा हुआ

साल 1962-63 के बजट में इनकम टैक्स में जबरदस्त इजाफा किया गया था। मोरारजी देसाई ने इनकम टैक्स की दर बढ़ाकर 72.5 फीसदी कर दिया था। इसमें कोई सरचार्ज शामिल नहीं था।

जब सरकार से नाराज हुई इंडस्ट्री

1963-64 के बजट में सरकार ने कंपनियों पर सुपर प्रॉफिट टैक्स लगाने का ऐलान किया था, जिसकी उद्योग जगत ने काफी आलोचना की थी।

पहली बार लगा एक्सपेंडिचर टैक्स

साल 1964-65 के बजट में सरकार ने पहली बार एक्सपेंडिचर टैक्स लगाया था। जिसे दो साल बाद खत्म कर दिया गया. सालाना 36,000 रुपए से ज्यादा खर्च करने वाले लोगों को यह टैक्स चुकाना पड़ता था।

ब्लैकमनी पर कसा था शिकंजा

साल 1965-66 के बजट में सरकार ने पहली बार ब्लैकमनी और टैक्स चोरों से निपटने की स्कीम पेश की थी। इसके तहत लोग अपनी स्वेच्छा से RBI में अपने काले धन का खुलासा कर सकते थे।

खत्म हुआ एक्सपेंडिचर टैक्स
 
सरकार ने दो साल पहले जो एक्सपेंडिचर टैक्स शुरू किया था उसे साल 1966-67 के बजट में खत्म कर दिया गया। यह टैक्स लोगों के बेहिसाब संपत्ति रखने पर लगाया गया था।

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