प्रतिमा शर्मा

कोरोनावायरस संक्रमण के बाद पहले ही यह उम्मीद थी कि इस बार सरकार का फोकस अर्थव्यवस्था, कंपनियों और इंडस्ट्री को बढ़ावा देने पर होगा। तो इसी उम्मीद के मुताबिक, फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया। इसमें इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई ऐलान किए गए लेकिन आम आदमी को अनदेखा कर दिया गया। आम आदमी बजट इसी उम्मीद से देखता है कि शायद बजट के दूसरे चऱण में उसकी जेब के लिए कोई फैसले आ जाए। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ।
 
वित्त मंत्री ने सीनियर सिटिजंस को जरूर थोड़ी राहत दी है। अब 75 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों को इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरना होगा। यानी जिन बुजर्गों की आमदनी का जरिया पेंशन या इंटरेस्ट इनकम है उन्हें अब रिटर्न फाइल करने की दिक्कत नहीं उठानी होगी। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया है कि डिविडेंड इनकम इस दायरे में आएगी या नहीं। बजट की डिटेल आने के बाद इसके बारे में पता चलेगा। हालांकि एक बात जो बिल्कुल साफ है वो ये है कि आम आदमी को इनकम टैक्स में कोई राहत नहीं दी गई है।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण की शुरुआत करते हुए गुरु रविंद्रनाथ टैगोर की ये पंक्तियां दोहराई थीं।   उन्होंने रविंद्रनाथ टैगोर की कविता का जिक्र करते हुए कहा- Hope is the bird who feels the light and sings while the dawn is still dark. भरोसा उस चिड़िया की तरह है जो रोशनी का अहसास करते हुए सुबह होने से पहले ही चहचहाना शुरू कर देती है। इसी तरह हमें भी मुश्किल वक्त में उम्मीद का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने अपना बजट भाषण शुरू करते ही यह साफ कर दिया था कि सरकार हर हाल में ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए तैयार है। उन्होंने दो बातों की तरफ ध्यान दिलाया, कोरोना वायरस से लड़ने में सरकार की मेहनत और खर्च और दूसरा, आमलोगों द्वारा झेली गई मुश्किलें। इससे ऐसा लगा कि आमलोगों को भी कुछ मिल सकता है लेकिन बजट खत्म होने पर ये उम्मीदें भी अगले साल के लिए टल गई हैं।

कोरोनावायरस संक्रमण के बाद पेश किए अपने पहले बजट में निर्मला सीतारमण ने इंश्योरेंस कंपनियों को अच्छी राहत दी है। इंश्योरेंस सेक्टर में अब विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 74 फीसदी कर दी गई है। पहले यह 49 फीसदी थी। बीमा कंपनियों को इसका इंतजार लंबे समय से था। 

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