भुवन भास्कर

आम बजट वैसे तो हर साल लोगों के लिए उनकी फाइनेंशियल प्लानिंग में उम्मीदों का एक नया अध्याय लेकर आता है, लेकिन 2021-22 के बजट से हर वर्ग कुछ ज्यादा ही उम्मीद लगाए बैठा है। इसके पीछे कुछ ठोस कारण भी हैं। साल 2020 देश के करोड़ों लोगों के लिए एक बुरे सपने जैसा था, जिसमें उन्हें या तो अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, अपना कारोबार बंद करना पड़ा; या तो अपने वेतन में कटौती का सामना करना पड़ा या फिर धंधे में अभूतपूर्व मंदी का सामना करना पड़ा। ऐसे में चाहे उद्योग हों या नौकरीपेशा करदाता, हर किसी को उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन उसके लिए कुछ तो ऐसा खास लेकर आएंगी कि उसकी मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों में कुछ राहत मिलेगी।

नौकरीपेशा करदाताओं के लिए इस बजट में क्या कुछ खास हो सकता है, इस बारे में विशेषज्ञों की राय बहुत बंटी हुई है। विशेष तौर पर ऐसे वक्त जब कोरोना के कारण ध्वस्त हुई आर्थिक गतिविधियों और बढ़े खर्चों की पृष्ठभूमि में सरकार का वित्तीय घाटा 3.5% के लक्ष्य से दोगुना होकर 7% तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही हो, तब निश्चित तौर पर इनकम टैक्स में बड़ी राहत दे पाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

लेकिन इसके बावजूद वित्त मंत्री का यह वादा कि 2021-22 का बजट ग्रोथ को समर्पित रहने वाला है, कहीं न कहीं इस उम्मीद को भी जिंदा रखे हुए है कि मध्य वर्ग के लिए राहत की कोई बड़ी खबर आ सकती है। तो आइए देखते हैं कि करदाताओं के लिए यह राहत किन-किन मोर्चों पर आ सकती है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन

फिलहाल सभी करदाताओं के लिए 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन तय है। साल 2018-19 में सरकार ने मेडिकल अलाउंस और ट्रैवल अलाउंस पर मिलने वाली इनकम टैक्स छूट को समाप्त कर स्टैंडर्ड डिडक्शन की शुरुआत की थी। इस बजट में सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 75,000 से 1,00,000 रुपये तक कर सकती है।

न्यूनतम कर छूट सीमा

पिछले साल वित्त मंत्री सीतारमन ने पुरानी टैक्स व्यवस्था को कायम रखते हुए एक नई टैक्स व्यवस्था भी पेश की। इन दोनों ही आयकर व्यवस्थाओं में सामान्य करदाताओं के लिए 2.50 लाख रुपये तक की आमदनी पर कोई कर देय नहीं है। चर्चा है कि इस सीमा को बढ़ाकर दोनों ही रिजीम में 5 लाख रुपये तक किया जा सकता है।

साल 2019 के बजट में सरकार ने 5 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों के लिए यह सीमा 5 लाख कर दी थी, जिसका मतलब है कि जिनकी आय 5 लाख रुपये तक है, उन्हें कोई टैक्स देने की जरूरत नहीं है, लेकिन जैसे ही आपकी आमदनी 5 लाख 1 रुपया होती है, आप सामान्य टैक्स स्लैब के दायरे में आ जाते हैं। यदि वित्त मंत्री न्यूनतम कर छूट सीमा को सबके लिए बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर देती हैं, तो सभी करदाताओं के हाथ में खर्च के लिए 12,500 रुपये अतिरिक्त बचेंगे।

टैक्स स्लैब में बदलाव

सीतारमन के सामने एक अन्य विकल्प पुरानी और नई रिजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव करना भी है। दोनों ही रिजीम में इस समय 2.5-5 लाख रुपये तक की आय पर 5% का टैक्स देय है। इसके बाद पुरानी व्यवस्था में 5-10 लाख रुपये के बीच की आय पर 20% और 10 लाख रुपये से ऊपर की आय पर 30% टैक्स देना होता है। नई टैक्स व्यवस्था में यह स्लैब 5-7.5 लाख, 7.5-10 लाख, 10-12.5 लाख, 12.5-15 लाख और 15 लाख रुपये से ऊपर क्रमशः 10%, 15%, 20%, 25% और 30% है। इनमें बदलाव कैसे और कितना होगा, यह अनुमान लगा पाना तो कठिन है, लेकिन यदि न्यूनतम कर छूट सीमा 5 लाख रुपये तक की जाती है तो, बहुत संभव है कि पूरा स्लैब सिस्टम एक-एक पायदान ऊपर खिसक जाए और ऐसी स्थिति में करदाताओं को बड़ी राहत मिल सकती है।

कोविड इफेक्ट

सूत्रों के मुताबिक बजट में कोविड के नाम से कुछ राहत मिल सकती है। एक ओर तो कोविड पर होने वाले मेडिकल खर्च को कर छूट में शामिल किया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर कोविड या वर्क फ्रॉम होम के लिए कोई अलाउंस भी घोषित किया जा सकता है। हालांकि कोविड वैक्सीन पर सरकार के लगभग 50,000-60,000 करोड़ रुपये खर्च होने जा रहे हैं, जिसे पूरा करने के लिए यह लगभग तय माना जा रहा है कि कुल देय टैक्स पर कोविड सेस लगाया जा सकता है। तो यह देखने वाली बात होगी कि सरकार कोविड सेस को किस तरह संतुलित करती है।

रियल एस्टेट कैपिटल गेन टैक्स

एक फ्रंट यह भी है जिस पर उम्मीद की जा रही है कि कुछ बदलाव सामने आए। फिलहाल रियल एस्टेट सेक्टर में खरीद-बिक्री के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स के लिए 24 महीने की न्यूनतम अवधि है, जिससे पहले यदि आप कोई संपत्ति बेचते हैं, तो वह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) की श्रेणी में आता है। LTCG में मुनाफे पर आपको 20% टैक्स देना होता है। इसमें अवधि को घटा कर 12 महीने किया जा सकता है या फिर मुनाफे पर टैक्स घटा कर 10% किया जा सकता है या फिर दोनों ही किया जा सकता है।

छूट में बढ़ोतरी

कराधान की पुरानी व्यवस्था में फिलहाल 80C, 80D और होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूटें प्रमुख हैं। लंबे समय से मांग की जा रही है कि 80C में मिल रही 1.5 लाख रुपये की छूट को बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये तक किया जाए। वित्त मंत्री हो सकता है इस बजट में इस मांग पर तवज्जो करें और इस सीमा को कम से कम 2 लाख रुपये तक तो कर ही दें। इसी तर्ज पर होमलोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट की सीमा को खत्म किया जा सकता है। यानी फिलहाल जो 2 लाख रुपये की सीमा है, उसे हटाकर कुल कर्ज की सीमा तय की जा सकती है।     

ये सारे राहत के वो विकल्प हैं, जो वित्त मंत्री के सामने हैं यदि वह लगभग 3.5 करोड़ करदाताओं को देना चाहें। लेकिन इन सबमें यह जरूर ध्यान में रखना चाहिए कि वित्त मंत्री के लिए किसी भी राहत की घोषणा से पहले अपना आय-व्यय का गणित दुरुस्त रखना सबसे अहम होगा और यही मध्य वर्ग की उम्मीदों के हकीकत बनने में सबसे बड़ी बाधा है।

(लेखक कृषि एवं आर्थिक मामलों के जानकार हैं)

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