आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश के कुल खर्च, कुल राजस्व, घाटा और ऋण सहित सरकार के वित्त (Finance) का व्यापक विवरण प्रस्तुत करेंगी। सामान्य भाषा में कहें तो बजट सरकार के खर्च और कमाई का लेखा-जोखा होता है। बजट भाषण के दौरान आपने एनुअल फाइनेंसियल स्टेटमेंट (Annual Financial Statement), मुद्रास्फीति (inflation), और विनिवेश (Disinvestment) जैसे कई फाइनेंशियल टर्म सुने होंगे, जिन्हें समझना सरकार के अगले वर्ष की योजना से अवगत होने के लिए बहुत जरूरी है। इन्हीं फाइनेंशियल टर्म्स को समझते हैं आसान भाषा में...

वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual financial statement)

आम बजट को उस वर्ष का वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual financial statement) भी कहा जाता है। संविधान के आर्टिकल 112 के तहत केंद्र सरकार अपने सभी खर्च और आमदनी का लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है। इसके अलावा इससे अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की योजनाओं और उस पर होने वाले खर्च के अनुमान के बारे में भी पता चलता है। आपको बता दें कि बजट या Annual financial statement के लिए सरकार को संसद से मंजूरी लेनी होती है। संसद की मंजूरी के बिना केंद्र सरकार भारत का समेकित कोष (Consolidated Fund of India) से एक रुपये की नहीं निकाल सकती है।

मुद्रास्फीति (Inflation)

प्रोडक्ट्स और सर्विसेज के मूल्य में होने वाली वृद्धि को मुद्रास्फीति कहा जाता है। आसान भाषा में इसे महंगाई कहते हैं। जब डिमांड और सप्लाई में असंतुलन पैदा होता है तो प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की कीमतें बढ़ जाती हैं। कीमतों में यह वृद्धि ही मुद्रास्फीति कहलाती है। भारत में मुद्रास्फीति की गणना दो मूल्य सूचियों के आधार पर होता है। थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index- WPI) एवं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index- CPI) मुद्रास्फीति के कई प्रकार होते हैं जो अर्थव्यवस्था की अलग-अलग स्थितियों को दर्शाते हैं।
1.   Creeping Inflation (धीरे-धीरे बढ़ता हुआ)- इसमें महंगाई धीरे-धीरे बढ़ती है। यानी 1 साल में करीब 10% तक महंगाई बढ़ जाती है।
2.   Galloping Inflation (तेजी से बढ़ने वाली)- इसमें महंगाई तेजी से बढ़ती है, जैसे 20% की दर सं महंगाई बढ़ना।
3.   Hyperinflation (अति मुद्रास्फीति- इसमें महंगाई काफी तेजी से बढ़ती है यानी 1 साल में 30% से भी ज्यादा।
4.   Stagflation (रुकी हुई मुद्रास्फीति)- इसमें मुद्रास्फीति की स्थिति न तो बढ़ती है न ही घटती है।
5.   Deflation: (अपस्फीति)- इसमें मुद्रास्फीति की दर एक दम कम हो जाती है।

विनिवेश (Disinvestment)

सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया विनिवेश या डिसइन्वेस्टमेंट (Disinvestment) कहलाती है। अक्सर आम बजट में सरकार आगामी वित्त वर्ष के लिए विनिवेश का लक्ष्य तय करती है। सरकार के लिए विनिवेश पैसे जुटाने का महत्वपूर्ण जरिया है। सरकार शेयर बाजार में अपने हिस्से के शेयर की बिक्री का ऑफर जारी कर खुदरा और संस्थागत निवेशकों को PSU में निवेश करने के लिए आमंत्रित करती है। विनिवेश की इस प्रक्रिया के जरिए सरकार अपने शेयर बेचकर संबंधित कंपनी में अपना मालिकाना हक घटा लेती और इससे प्राप्त पासे को दूसरी योजनाओं पर खर्च करती है। विनिवेश या तो किसी निजी कंपनी के हाथ किया जा सकता है या फिर उनके शेयर पब्लिक में जारी किए जा सकते हैं।

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