Budget 2023: रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारतीय बैंकों को हिदायत दी है कि वह रिटेल लोन पर जरूरत से ज्यादा फोकस ना करें नहीं तो मुश्किल में पड़ जाएंगे। रघुराम राजन ने चेताया है कि अगर मंदी का दौर शुरू होता है तो रिटेल सेक्टर पर सबसे ज्यादा जोखिम रहेगा। रघुराम राजन इन दिनों दावोस में चल रहे इकोनॉमिक फोरम में हैं। उन्होंने वहीं बताया, "अगर देखेंगे कि भारतीय बैंक रिटेल लोन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। क्या इस पर इतना जोर देना सही है? क्या बैंक इसमें छिपे जोखिम को देख पा रहे हैं।" पिछले कुछ समय में भारतीय बैंकों ने रिटेल लोन पर बहुत ज्यादा फोकस बढ़ाया है। होलसेल लोन के मुकाबले ज्यादातर बैंकों का रिटेल लोन एसेट्स बढ़ा है।
रघुराम राजन ने कहा, पहले भी ऐसी दिक्कत इंफ्रास्ट्रक्चर लोन के साथ आ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सेक्टर को लोन देते हुए बैंकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वहां जोखिम कितना है।
राजन ने कहा, "साल 2007, 2008 और 2009 में बैंकों का रूझान इंफ्रास्ट्रक्चर लोन पर था क्योंकि उस वक्त उन्हें उससे फायदा हो रहा था। लेकिन बाद में इसी से दिक्कत शुरू हो गई थी।"
एसेट क्वालिटी के बारे में बात करते हुए रघुराम राजन ने कहा कि रिपेमेंट में कुछ प्रगति नजर आ रही है। उन्होंने कहा, "हमने अच्छी प्रोग्रेस दिखाई है। कुछ बिजनेस हाउस ने अपना लोन पूरी तरह या उसका एक बड़ा हिस्सा चुका दिया है।"
हालांकि रघुराम राजन ने यह भी याद दिलाया कि जब बैंकों ने इंफ्रा सेक्टर को अनापशनाप लोन बांटना शुरू किया तो कैसे बैड लोन बढ़ता गया। राजन ने कहा, "महामारी से यह अनुभव मिला है कि स्मॉल एंड मीडियम साइज्ड एंटरप्राइजेज (SMES) पर बैड लोन ज्यादा नहीं था। वह अपना बैड लोन चुकाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।"
भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ और बैंकों से जुड़ी दिक्कत के बारे में रघुराम राजन ने कहा, "भारत हमेशा से आशावादी रहा है लेकिन इस साल हमें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।" बैंकों को फिलहाल यह ध्यान देना होगा कि लोन की वजह से वह किसी मुश्किल में ना फंसे।