कोरोना संकट के बाद से MSME सेक्टर एक बार फिर से उबरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में आगामी बजट बड़ा मौका है सरकार के लिए छोटे कारोबारियों को और राहत और मैनुफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट देने के लिए। लेकिन MSME सेक्टर से जुड़े कारोबारियों की खुद बजट से क्या उम्मीदें हैं और वित्त मंत्री से और किस तरह की राहत की उम्मीद कर रहे हैं ये जानने के लिए नोएडा में Indian Industries Association से जुड़े उद्यमियों से बात की सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता आलोक प्रियदर्शी ने।
उद्यमियों की मांग है कि मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम होनी चाहिए। रॉ मैटेरियल सस्ता करने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी घटनी चाहिए। पार्टनरशिप फर्म्स और LLPs के लिए टैक्स में छूट मिलनी चाहिए। कॉरपोरेट सेक्टर के मुकाबले MSMEs पर ज्यादा इनकम टैक्स लगता है। इमरजेंसी क्रेडिट लाइन की वजह से MSMEs को राहत मिली है। लेकिन इस स्कीम से सभी MSMEs को फायदा नहीं मिला है। सख्त Basel Norms की वजह से बैंकों से कर्ज नहीं मिल रहा है। महंगी बिजली दरों की वजह से इंडस्ट्री को परेशानी हो रही है। इन उद्यमियों की मांग है कि ये भी मांग है कि इंडस्ट्री के लिए सस्ती कीमत पर जमीन उपलब्ध होनी चाहिए।
कोरोना संकट की वजह से नौकरियों पर जो संकट पैदा हुआ है उसको देखते हुए बजट में सरकार से उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। सरकार के सामने मौजूदा नौकरियों को बचाना और नई नौकरियां पैदा करना सबसे बड़ी चुनौती है। बजट से नौकरी तलाश रहे उम्मीदवारों की क्या है उम्मीदें है। सरकार को कौन से सेक्टर पर ज्यादा फोकस करना चाहिए, मौजूदा बहाली प्रक्रिया में क्यो हो बदलाव, इस पर बात की सीएनबीसी-आवाज संवाददाता प्रकाश प्रियदर्शी ने लोगों से बात की।
इस बातचीत में ये निकलकर आया की बजट में सरकार नौकरी पैदा करने पर फोकस करे। खाली सीट भरने के लिए जल्द वैकेंसी निकाली जाएं। फॉर्म भरने के लिए एक ही प्लेटफॉर्म हो। सरकारी-निजी सेक्टर में बैलेंस बनाने की जरूरत है। डिग्री के हिसाब से वेतनमान मिले। सरकार डिग्री के बाद जॉब गांरटी जैसी स्कीम लाए। स्किल डेवलपमेंट के लिए नए तरीके अपनाए जाएं। स्किलिंग के बाद सरकार नौकरी भी दे। निजी नौकरियों की जानकारी के लिए सिस्टम बने और भर्तियां रद्द करने पर फॉर्म का पैसा वापस हो।
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