अपने खर्च और कमाई का लेखा-जोखा पेश करने वाली है सरकार। बजट 2018 पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। बजट का एक सूत्र जो करोड़ों लोगों को एक साथ बांधता है वो है इनकम टैक्स। हर बजट के पहले हर टैक्स पेयर चाहता है कि उसके बजट का बोझ कम हो और अगर ये देना भी हो तो ये सहूलियत का सौदा हो। सीएनबीसी-आवाज़ बजट घटाओ आंदोलन के जरिए टैक्स पेयर्स की इसी मांग को आवाज़ दे रहा है। सीएनबीसी-आवाज़ के साथ यहां इस मुहिम में शामिल हो रहे हैं टैक्स एक्सपर्ट्स मुकेश पटेल, शरद कोहली, अमिताभ सिंह और प्रीति खुरान। इनसे ये समझने की कोशिश की जाएगी कि ये बजट टैक्स पेयर्स की उम्मीदों पर कितना खरा उतरेगा।
मुकेश पटेल का कहना है कि 2018 के बजट से टैक्सपेयर्स को काफी उम्मीदें हैं, ये बजट आम आदमी के लिए खास होगा। चुनाव के चलते बजट में राहत की उम्मीद है।
अमिताभ सिंह का कहना है कि इस बजट में लोकलुभावन घोषणाओं की उम्मीद है। जनता ने काफी तकलीफें झेलीं हैं अब जनता को ईनाम मिलना चाहिए। इस बजट में टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। सरकार टैक्स बेस बढ़ाना चाहती है। देश 2 फीसदी लोग ही रिटर्न फाइल करते हैं। टैक्स स्लैब का दायरा 3 लाख या ज्यादा करने की जरूरत है।
शरद कोहली के मुताबिक 2.5 लाख रुपये के स्लैब को बदलना वित्त मंत्री के लिए मुश्किल है। इनकम टैक्स नियमों में समय-समय पर बदलाव जरूरी है। चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस 100 रुपये प्रति बच्चा काफी कम है। इसी तरह मेडिकल अलाउंस 15000 रुपये सालाना भी काफी कम हैं। वित्त मंत्री को इस पर ध्यान देना चाहिए।
प्रीति खुरान का कहना है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन वापस लाने पर चर्चा जारी है। टैक्स स्लैब का दायरा 3 लाख रुपये से ऊपर होना चाहिए। स्टैंडर्ड डिडक्शन सबके लिए होना चाहिए।