बजट आने में अब बस चंद दिनों का वक्त बचा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 100 साल में सबसे शानदार बजट के बयान के बाद इस साल के बजट से सभी की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। इसमें केमिकल सेक्टर भी शामिल है। केमिकल सेक्टर कई मायनों में अहम है। एक तरफ तो एग्रो, फार्मा, तेल-गैस, टेक्सटाइल समेत कई सेक्टर्स को केमिकल इंडस्ट्री से कच्चा माल मिलता है तो वहीं दूसरी ओर रोजगार और निवेश के मोर्चे पर भी सेक्टर बड़ी भूमिका निभाता है। सरकार के आत्मनिर्भर बनने में केमिकल सेक्टर बड़ा रोल अदा करेगा। ऐसे में सेक्टर की नजर वित्त मंत्री पर हैं कि उन्हें बजट में क्या मिलता है। इस मु्द्दे पर बात करने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ हैं Vinati Organics की MD Vinati Saraf Mutreja, Deloitte India में Partner Savan Godiawala.

बजट उम्मीद- केमिकल सेक्टर

आवाज़ के साथ इन दिग्गजों की बातचीत से निकल कर आया कि बजट में किसानों को DBT( Direct Benefit Transfer) का फायदा मिल सकता है। इस बार के बजट में फॉसफोरिक एसिड, अमोनिया पर इंपोर्ट ड्यूटी घट सकती है। सेक्टर के लिए PLI स्कीम भी संभव है। इंडस्ट्री दिग्गजों की मांग है कि PLI स्कीम में केमिकल सेक्टर से जुड़ी इंडस्ट्री भी शामिल होनी चाहिए।

इनकी मांग है कि कच्चे माल पर इंपोर्ट ड्यूटी आसान होनी चाहिए। एग्रो केमिकल कीमतें घटनी चाहिए। एग्रो केमिकल में R&D को बढ़ावा मिलना चाहिए।
घरेलू बाजार में उत्पादन को बढ़ावा मिलना चाहिए।

केमिकल सेक्टर को क्या मिला

केमिकल सेक्टर के बजट आवंटन पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2021 में इस सेक्टर के लिए बजटीय आबंटन 218 करोड़ रुपए था। वहीं,  वित्त वर्ष 2021 में इस सेक्टर के लिए बजटीय आबंटन 370 करोड़ रुपए था। PTA से एंटी डंपिंग ड्यूटी हटा ली गई है। PTA हटने से RIL और IOC को फायदा हुआ है। PTA का इस्तेमाल टेक्सटाइल कंपनियां करती हैं।

आइए जानते हैं क्या है PLI स्कीम

PLI यानि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम का मकसद है मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की मुहिम को बढ़ावा देना। मिसाल के तौर पर हमारी फार्मा इंडस्ट्री दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी है लेकिन दुनिया के दवा एक्सपोर्ट में हमारा हिस्सा केवल 3.5 फीसदी है। इस स्कीम के तहत सरकार 13 सेक्टरों में काम करने वाली कंपनियों को उनके उत्पादन के 4-6 फीसदी के करीब इंसेन्टिव देगी। सरकार ने पहले चरण में तीन सेक्टर्स मोबाइल, फार्मा एपीआई और मेडिकल डिवाइस के लिए पीएलआई को मंजूरी दी थी।

नवंबर 2020 में इसमें 10 सेक्टर और जोड़े गए जिनमें बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स वगैरह शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे देश में उत्पादन और एक्सपोर्ट दोनों बढ़ेगे। मिसाल के तौर पर बल्क दवाओं के लिए जारी 6940 करोड़ की पीएलआई के दम पर उत्पादन में 46400 करोड़ रु. की बढ़ोतरी का अनुमान है जिससे रोजगार भी बढ़ेगा। उम्मीद ये भी है कि विदेशी कंपनियां भारत में उत्पादन करके एक्सपोर्ट करेंगी।


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