किसी निवेश पर मिलने वाले मुनाफे को कैपिटल गेन कहते हैं। आप किसी ऐसेट में निवेश करते हैं जो शेयर, बांड, प्रॉपर्टी या गोल्ड हो सकता है। जब आप इस ऐसेट को बेचने जाते हैं तब तक उसके दाम बढ़ जाते हैं। खरीद और बिक्री के दाम के बीच का अंतर आपका मुनाफा या कैपिटल गेन होता है और इसपर लगने वाला टैक्स कैपिटल गेन्स टैक्स। अलग अलग ऐसेट जैसे शेयर, बांड, प्रॉपर्टी, गोल्ड पर टैक्स की दरें अलग - अलग होती हैं। साथ ही साथ लांग टर्म और शॉर्ट टर्म की परिभाषा भी अलग होती है।
मिसाल के तौर पर अगर आप एक साल से कम समय में शेयर बेच देते हैं तो आपको 15 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है। साल भर से ज्यादा वक्त के बाद मुनाफा वसूली करने पर 10 फीसदी लांग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। प्रॉपर्टी पर निवेश के लिए लांग टर्म का फायदा दो साल के बाद मिलता है। साथ ही इसमें इंडेक्सेशन बेनिफिट भी मिलता है। सरकार एक इंडेक्स जारी करती है जो ये बताता है कि महंगाई के साथ आपकी प्रॉपर्टी के दाम कितने बढ़ने चाहिए । इस इंडेक्स के आधार पर आपकी प्रॉपर्टी खरीद का दाम बढ़ाकर फिर मुनाफे की गणना की जाती है। सोने, बांड और डेट म्यचुअल फंड में निवेश पर लांग टर्म तीन साल के बाद माना जाता है।
किस ऐसेट पर कितना कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है इस पर नजर डालें तो EQUITY में SHORT TERM में 15 फीसदी कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं, इसकी LONG TERM RATE 10 फीसदी होती। PROPERTY पर SHORT TERM में ये कमाई में जुड़ जाता है। वहीं, इसकी LONG TERM RATE 20 फीसदी होती है। गोल्ड और डेट फंड में भी ये कमाई में जुड़ जाता है और इसकी LONG TERM RATE 20 फीसदी होती है।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के होल्डिंग पीरियड पर नजर डालें तो एक्वीटी होल्डिंग 1 साल से ज्यादा होने, PROPERTY की होल्डिंग 2 साल से ज्यादा होने और GOLD,DEBT FUND की होल्डिंग 3 साल से ज्यादा होने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है। होल्डिंग की अवधि निर्धारित सीमा से कं होने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है।
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