Economic Survey 2020 । इकोनॉमिक सर्वे में चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने लिखा है कि सरकारी दखल की वजह से इकोनॉमी को जितना सपोर्ट नहीं मिलता, उससे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार कर्ज माफी या फूड सब्सिडी जैसे जो फैसले लेती है, उसकी वजह से फ्री मार्केट डिस्टर्ब होता है।
सर्वे में यह भी कहा गया है कि किसानों की कर्ज माफी से क्रेडिट कल्चर और क्रेडिट फ्लो बिगड़ता है। सर्वे के मुताबिक, "राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से कर्ज माफी का जब एनालिसिस किया गया तो पता चला कि आंशिक कर्ज माफी के मुकाबले पूर्ण कर्ज माफी वाले किसान कम खर्च करते हैं, कम बचाते हैं, कम निवेश करते हैं और प्रोडक्टिव होते हैं।"
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने आज संसद में इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। सर्वे में कहा गया है कि जब मार्केट सिटीजंस वेलफेयर का काम खुद कर सकता है तो सरकार के जरूरत से ज्यादा दखल से मार्केट की चाल बिगड़ती है।
उदाहरण के तौर पर सर्वे में एसेंशियल कमॉडिटी एक्ट जैसे पुराने कानूनों को खत्म करने की बात की गई है। सर्वे में यह भी कहा गया कि मार्केट को इकोनॉमी फ्रीडम देने और तेजी से वेल्थ क्रियेशन के लिए पुराने कानूनों को खत्म कर देना चाहिए।
सर्वे में यह भी कहा गया है कि सरकार को अनाज मार्केट में भी दखल नहीं देना चाहिए। रिपोर्ट का कहना है कि सरकार चावल और गेहूं की सबसे बड़ी खरीदार है जिसकी वजह से फू़ड सब्सिडी का बोझ बढ़ता है और मार्केट का प्रभाव कम होता है।
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