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Exclusive:विदेशी निवेश को मिलेगी चुटकियों में मंजूरी, बजट में होगा SWIFT का एलान: सूत्र

भारत में बड़े विदेशी निवेशक के लिए रास्ता आसान करने के मकसद से बजट में खास ऐलान हो सकता है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 05, 2021 पर 10:02 PM
 Exclusive:विदेशी निवेश को मिलेगी चुटकियों में मंजूरी, बजट में होगा SWIFT का एलान: सूत्र

भारत में बड़े विदेशी निवेशक के लिए रास्ता आसान करने के मकसद से बजट में खास ऐलान हो सकता है। CNBC-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक सरकार  Special Window for Financial Investors Facilitation यानी SWIFT का ऐलान कर सकती है। ये SWIFT कैसे काम करेगा ये बताते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के इकोनॉमिक पॉलीसी एडीटर लक्ष्मण रॉय  ने बताया कि SWIFT के तहत  5000 करोड़ से ज्यादा के निवेश को मंजूरी तुरंत मिलेगी। इस तरह के निवेश प्रस्ताव को 3 दिन के भीतर रिस्पॉन्स मिलेगा। प्रस्ताव की हर 15 दिन में सीनियर अधिकारी समीक्षा करेंगे। इसमें Sovereign Wealth Funds, Pension Funds पर फोकस होगा। Private Equity, Venture Capital के निवेश का रास्ता भी आसान होगा।

इसके अलावा बजट से ही जुड़ी एक और खबर है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक बजट में तेल-गैस कंपनियों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। निवेश और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार टैक्स और चार्ज से जुड़े नए स्ट्रक्चर की घोषणा कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा सेस-रॉयल्टी स्ट्रक्चर में बदलाव हो सकता है। घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने के मकसद से ये एलान हो सकता है। मौजूदा रॉयल्टी में 50 फीसदी तक की कटौती हो सकती है। परंपरागत-गैर परंपरागत सोर्स की रॉयल्टी अलग हो सकती है।
मंत्रालय प्रोड्यूसिंग कंपनियों को राहत देने के पक्ष में है।  Pre-NELP ब्लॉक पर सेस या मुनाफा लेने की सिफारिश की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से ये सिफारिशें की हैं। टर्मिनल एक्साइज ड्यूटी को हटाने की भी मांग की गई है।

बता दें आज सुबह ही INFO EDGE के CO-FOUNDER और VICE CHAIRMAN संजीव बिकचंदानी ने आईटी सेक्टर की बजट से उम्मीदों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आईटी में रिस्क कैपिटल को राहते देने के लिए टैक्स छूट मिलना चाहिए। देश में आईटी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप पर फोकस होना चाहिए। आज के स्टार्टअप ही कल के दिग्गज बनेंगे। स्टार्टअप को टैक्स में छूट और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा था कि देश में लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों के लिए कैपिटल लाने के लिए एक जैसे नियम होने चाहिए। ईज आफ डूइंग बिजनेस में छोटी कंपनियों की जरूरतों को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। वित्त मंत्री से हमें फिस्कल स्टिमुलस की उम्मीद है। देश में ईज आफ डूइंग बिजनेस के साथ ही ईज आफ इन्वेस्टमेंट की बड़ी जरूत है।


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