मोदी सरकार अब सरकारी बैंकों को अलग से फंड देने के लिए विचार शायद विचार नहीं करेगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, फिस्कल ईयर 2020-21 के लिए बनने वाले बजट में सरकारी बैंकों को अतिरिक्त फंड देने की घोषणा नहीं करेगी। सरकार बैंकों के डूबे लोन की वसूली तेज करने और मार्केट से फंड जुटाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का बजट 1 फरवरी 2020 को पेश करेंगी। जिसमें 31 जुलाई को आर्थिक सर्वे आएगा। बजट को पेश करने के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार के बजट में कई रियायतों की घोषणा कर सकती हैं। साथ ही सरकारी बैंकों के अलग से कोई फंड नहीं दिया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कैलेंडर साल में बैंकों के पास NCLT और Non-NCLT  दोनों तरह से डूबे लोन की वसूली कर सकते हैं। इसके अलावा बैंकों के पास मार्केट से भी फंड जुटाने की गुंजाइश रहेगी।

दरअसल, मौजूदा समय में सरकारी बैंकों का प्रावधान कवरेज अनुपात (Provision Coverage Ratio) 7 साल के हाईएस्ट लेवल 76.6 फीसदी पर है। साथ ही NPA के मामले में भी बैंकों ने 100 फीसदी तक का प्रावधान किया है। कुछ बैंकों का शेयर प्राइस मजबूत हो रहा है। उनके पास सरकारी हिस्सेदारी बेचने का भी ऑप्शन है।

बता दें कि वित्त मंत्रालय ने 14 अक्टूबर से 2020-21 के बजट की तैयारियां शुरू कर दी थी। फिलहाल अभी इसका अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

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