नीरज बाजपेयी
सीनियर एडिटर, सीएनबीसी-आवाज़
नीरज बाजपेयी
सीनियर एडिटर, सीएनबीसी-आवाज़
मोदी सरकार के लिए वित्त वर्ष 2016-17 का बजट आर्थिक मामलों से ज्यादा राजनीतिक कारणों से अहम हो गया है। अगर मैं कहूं कि आगे कुआं पीछे खाई जैसी स्थिति है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। दरअसल मुद्दा ये है कि घनघोर ग्लोबल मंदी के बीच अर्थव्यवस्था को बचाना और कारोबार को रफ्तार देना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है और इस जरूरत को पूरा करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली को कड़े फैशले लेने होंगे। दूसरी ओर चुनावों को देखते हुए गरीबों के हित वाली सरकार की इमेज भी बनानी है। इसी साल असम, बंगाल और अगले साल के शुरू में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं। यही सबसे बड़ी दिक्कत है क्योंकि भारत जैसे देश में, जहां हर साल दो चुनाव होते हैं, लोगों को खुश रखना जरूरी है।
थोड़ा पीछे जाते हैं जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब कुछ घटनाक्रम ऐसे हुए कि मोदी सरकार को सूटबूट की सरकार और उद्योगपतियों के लिए काम करने वाली सरकार बता दिया गया, जो चुनावी गणित के लिहाज से मोदी जी को सूट नहीं करता। दिल्ली और बिहार के चुनाव में करारी हार के बाद तो सरकार बेहद सतर्क है इसलिए सरकार अब पूरी कोशिश कर रही है कि वो गरीबों की समर्थक सरकार दिखे। पिछले बजट में भी आपको याद होगा कि सामाजिक योजनाओं पर खास फोकस किया गया था। मुद्रा बैंक, जनधन, अटल पेंशन और बीमा योजना इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं, इसके साथ ही अमीरों की एलपीजी सब्सिडी खत्म करके भी ये संकेत दिए हैं कि सरकार गरीबों का पूरा ख्याल रख रही है। इस साल के बजट में एक बार फिर से गांवों, किसानों और मजदूरों के लिए कई योजनाओं पर फोकस होगा, और साथ ही युवाओं को रोजगार देने की भी कोशिश होगी. मैं ये इसलिए कह रहा हूं कि देश का सबसे बड़ा वोट बैंक इन्हीं वर्ग से आता है।
मध्यमवर्ग को भी साथ जोड़ने के लिए पर्सनल इनकम टैक्स में कुछ राहत का एलान हो सकता है जैसे कि टैक्स छूट की सीमा बढ़ सकती है और घर खरीदने के लिए सस्ता कर्ज मुहैया कराने की व्यवस्था हो सकती है। वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना भले ही सरकार के खजाने पर बोझ डाले लेकिन मध्यवर्ग को खुश करने के लिए ये कदम उठाने को सरकार मजबूर होगी। ये सारे उपाय राजनीतिक तौर पर सरकार को सूट करते हैं।
लेकिन इसके साथ ही सरकार को इकोनॉमी को पटरी पर लाने के उपाये भी पूरी ताकत से लागू करने होंगे, मेक-इन-इंडिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इसके सबसे बड़े टूल हैं। सरकार के नसीब से कच्चे तेल में भारी गिरावट आई है जो इकोनॉमी के लिए वरदान से कम नहीं है, अब देखते हैं कि सोमवार को किस किस का नसीब खुलता है।
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