कोरोना संकट की वजह से फंसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए डेवलपर्स ने बजट में अलग से फंड बनाने की मांग की है। साथ ही इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम को बहाल करने और अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में 75 लाख रुपए तक के मकानों को शामिल करने की मांग की है।
कोरोना महामारी से डिमांड में कमी और नकदी संकट की वजह से अटके रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए डेवलपर्स बजट में वित्त मंत्री से बड़े एलान की उम्मीद कर रहे हैं। डेवलपर्स के एसोसिएशन NAREDCO ने मांग की है कि SBI की मौजूदा स्कीम SWAMIH की तर्ज पर सरकार और Stress Funds मुहैया कराए ताकि सेक्टर नकदी के संकट से उबर सके। NAREDCO के प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी ने प्रधानमंत्री आवास योजना की तारीफ करते हुए कहा कि अफोर्डेबल सेगमेंट में 75 लाख रुपए तक के मकानों को शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि महानगरों में जमीन की कीमत काफी ज्यादा होती है।
इस बजट से बिल्डरों की बड़ी मागें है। डेवलपर्स चाहते हैं कि इनकम टैक्स की दरों में कटौती के साथ रियल इस्टेट ट्रांजेक्शन में भी इक्विटी के तर्ज पर LTCG Tax को घटाकर 10% करने की मांग की गई है। होमलोन के ब्याज़ में डिडक्शन को 2 लाख से बढ़ाने, होम बायर्स को सीधे फायदा पहुंचाने के लिए इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम को बहाल करना और SEZ को बूस्ट करने के लिए कदमों का ऐलान भी बिल्डरों की विश लिस्ट में शामिल है। DLF के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव तलवार ने रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए इनकम टैक्स में मौजूदा डिडक्शन को 30% से बढ़ाकर 50% करने की मांग रखी है।
NAREDCO ने उम्मीद जताई है कि अगले तीन महीनों में डिमांड एक बार फिर से प्री कोविड लेवल यानि 2019 के स्तरों पर पहुंच सकती है, बशर्ते सरकार को अटके प्रोजेक्ट्स को लेकर फुर्ती दिखाए। इससे सप्लाई बढ़ेगी बैंक समेत सेक्टर से जुड़े स्टेकहोल्डर्स को फायदा होगा और होमबार्यर्स का भी सस्ते घर का भी सपना पूरा हो सकेगा।
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