केंद्र सरकार के विनिवेश नीति में एयर इंडिया, भारत पेट्रोलियम सहित दर्जन भर कंपनियों की हिस्सा बिक्री की जायेगी। इस पर विपक्ष और राजनेताओं की ओर से सरकार को निशाना बनाया जा रहा है। विनिवेश पर स्वयं को सही साबित करने का प्रयत्न केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है। संसद के बजट अधिवेशन में BSNL और MTNL जैसी सार्वजनिक दूरसंचार कंपनियों के बारे में सरकार ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है।
पिछले कुछ सालों से भारत संचार निगम लिमिडेट और महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड इन दोनों सरकारी कंपनियों को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। इस पर सरकार इन दोनों कंपनियों को बंद करने का प्रयत्न कर रही है। ऐसा आरोप मजदूर यूनियनों ने किया था जबकि इसको लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है।
महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक संसद में दूरसंचार राज्यमंत्री संजय धोत्रे ने इसके बारे में सरकार की भूमिका स्पष्ट की है। उन्होंने लोकसभा में कहा कि भारत संचार निगम लिमिडेट और महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड इन दोनों सरकारी कंपनियों को बंद करने का सरकार का कोई विचार नहीं है। साल 2019-20 में बीएसएनएल के घाटे में बढ़ोत्तरी हुई है और ये घाटा 15500 करोड़ रुपये पहुंच गया है। वहीं एमटीएनएल को 3811 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। ये आंकड़ें धोत्रे ने बजट अधिवेशन के दौरान दिये हैं।
लोकसभा में प्रस्तुत किये गये लिखित उत्तर में धोत्रे ने कहा कि बीएसएनएल के 78569 कर्मचारियों ने स्वेच्छा सेवानिवृत्ति (VRS) लिया है। वहीं एमटीएनएल के 14387 कर्मचारियों ने भी वीआरएस लिया है। निवृत्ति वेतन योजना के लिए सरकार ने दोनों कंपनियों को 16206 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की है। इसमें से 14890 करोड़ रुपये अब तक इन कंपनियों को सौंपे जा चुके हैं। ऐसा धोत्रे ने स्पष्ट किया है।