रेल एक्सपर्ट अखिलेश्वर सहाय का कहना है कि रेल बजट में निवेश की नई शुरुआत होने के अलावा और कोई उपाय नहीं है। जितने भी बड़े निवेश हैं उनके आने के लिए ये समय एकदम अनुकूल है। अगर इस समय रेलवे में निवेश की नई शुरुआत नहीं हुई तो रेलवे का भविष्य खतरे में आ जाएगा।
रेलवे का राजस्व बढ़ाने की बात है तो पीपीपी के माध्यम से इतने पैसे नहीं आ पा रहे हैं। रेलवे के कुछ हिस्सों, स्टेशनों का निजीकरण हो या कुछ एडवर्टाइजिंग राजस्व बढ़ाने की बात हो तो ये काफी जरूरी है। रेलवे के पास देश के 53 फीसदी पैसेंजर हैं और इनमें से कई लोग बिना टिकट यात्रा करते हैं। रेलवे को चाहिए कि वो यात्री सुविधाएं बढ़ाए और इसके एवज में कुछ टिकट के दाम भी बढ़ाए जिसे देने में लोगों को दिक्कत नहीं होगी। जहां तक इस बार के रेल बजट की बात है तो रेलवे के किराए बढ़ाने ही होंगे और बढ़ेंगे ही।