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Rajnish Kumar से खास बात, जानिए बैंकिंग सेक्टर के लिए बजट से उनको क्या है उम्मीद

एक फरवरी को देश का बजट पेश होगा। लिहाजा, हर इंडस्ट्री ने अपनी-अपनी विश लिस्ट बना रखी है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 27, 2021 पर 12:50 PM
Rajnish Kumar से खास बात, जानिए बैंकिंग सेक्टर के लिए बजट से उनको क्या है उम्मीद

एक फरवरी को देश का बजट पेश होगा। लिहाजा, हर इंडस्ट्री ने अपनी-अपनी विश लिस्ट बना रखी है। चुनौतियों का सामना कर रही बैंकिग सेक्टर की भी इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। सवाल  ये है कि देश को आत्मनिर्भर बनाने वाले बजट में बैंकिंग सेक्टर पर कितना फोकस होगा? बैंकिंग सेक्टर की दिक्कतें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। BIG & BOLD IDEAS सीरीज के जरिए सीएनबीसी-आवाज़ ऐसे ही सवाल ढूंढ रहा है। आज की कड़ी में आवाज के साथ हैं। SBI के पूर्व चेयरमैन RAJNISH KUMAR। तो चलिए जानते हैं कि  बजट को लेकर क्या है उनके BIG & BOLD IDEAS.

इस बातचीत में  रजनीश कुमार ने कहा कि कोरोना संकट की स्थिति अब नियंत्रण में है। उम्मीद है कि फरवरी में आने वाले बजट में ग्रोथ पर सबसे ज्यादा फोकस होगा। निजी सेक्टर ने निवेश, खर्च कम किए हैं। फिलहाल फंडिंग की डिमांड कम है। कॉरपोरेट सेक्टर की ओर से डिमांड कम है। PSU बैंकों के कामकाज का तरीका बदलना जरूरी है। PSBs का प्रदर्शन निजी बैंकों की तरह होना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि बैड बैंक की फंडिंग को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। DFI(डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन) पर नए सिरे से विचार करना जरूरी है। DFI के लिए नई रूपरेखा बनाने की जरूरत है। निजीकरण का मतलब सिर्फ सरकारी हिस्सा घटाना नहीं होता। सरकारी बैंकों का प्रदर्शन सुधारने पर भी फोकस करना चाहिए।

बैंकिंग सेक्टर की बजट उम्मीदों पर आगे बात करते हुए रजनीश कुमार ने कहा कि NPA बनने के कई कारण होते हैं। इस बजट में बैड बैंक बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। नया डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (DFI) बनाने की भी चर्चा है।

सरकारी बैंकों में और पूंजी डालने से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि 2021 के बजट में 25 हजार करोड़ का प्रावधान संभव है। चालू साल में बैंकों को सरकार से 20 हजार करोड़ मिले हैं। वित्त वर्ष 2018-20 के दौरान बैंकों में 2.65 लाख करोड़ लगाए हैं।

कुछ सरकारी बैंकों के निजीकरण की तैयारी है। सरकार का बैंकों की ओर से ज्यादा कर्ज देने पर जोर रह सकता है। बैंकों में सरकारी हिस्से को होल्डिंग कंपनी के तहत लाया जा सकता है। रीजनल रूरल बैंकों के लिए भी होल्डिंग कंपनी बनाने का विचार हो सकता है। सरकारी बैंकों को कारोबार में स्वायत्तता दिए जाने की जरूरत है। निजी क्षेत्र की तरह सरकारी बैंकों को भी वेतन भत्ते तय करने की आजादी होनी चाहिए। सरकारी बैंकों के व्यापारिक हितों की रक्षा भी जरूरी है।


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