Budget 2020: सरकार इस बार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) से राहत दे सकती है। 2019 में तब के फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने शेयरों पर LTCG लगाने का फैसला किया था। हालांकि इसके बाद सरकार की काफी आलोचना हुई। इसका असर शेयर बाजार में होने वाले निवेश पर भी पड़ा।
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, अब सरकार निवेश बढ़ाने के लिए LTCG हटाने पर गौर कर सकती है। इसके लिए सरकार टैक्स एडवाइजर्स से भी बातचीत कर रही है। सरकारी अधिकारी और टैक्स एडवाइडजर्स विचार कर रहे हैं कि शेयर बाजार पर लगने वाले LTCG को हटा दें। साथ ही इसका होल्डिंग पीरियड 1 साल से बढ़ाकर 2 साल हो सकता है। इसके मायने हैं कि आपको निवेश में कम से कम 2 साल तक बने रहना होगा, तभी वह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के दायरे में आएगा।
फिलहाल 1 साल की होल्डिंग को ही लॉन्ग टर्म कहा जाता है और इस पर 10 फीसदी टैक्स लग रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी पिछले साल सितंबर में न्यूयॉर्क में एक भाषण दिया था। इस भाषण में उन्होंने कहा था कि सरकार इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स (Equity Investments) में लगने वाले टैक्स को ग्लोबल स्टैंडर्ड (Global Standard) के अनुसार करने के लिए काम कर रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया के कई देशों में LTCG टैक्स नहीं लगता है।
इस पूरी चर्चा में शामिल एक शख्स ने कहा कि सरकार रणनीतिक निवेशक और छोटे अवधि के लिए पैसा लगाने वाले निवेशकों में फर्क रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि LTCG लागू करने के सिर्फ दो साल बाद इसमें सिर्फ कटौती करना मुश्किल है। लेकिन यह विदेशी निवेशकों के लिए काफी अहम है। लिहाजा अगर होल्डिंग पीरियड को एक साल से बढ़ाकर 2 साल कर दिया जाता है तो यह लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए इनसेंटिव होगा।
इस मामले से जुड़े एक दूसरे शख्स ने कहा, "ग्लोबल लेवल पर भारत जिन विकसित देशों के मुकाबले पूंजी हासिल करना चाहता है, वहां LTCG नहीं है। सरकार को इनवेस्टर फोरम से भी सुझाव मिले हैं। इस मामली जानकारी रखे वाले लोगों ने बताया कि सरकार को उम्मीद थी कि LTCG लागू करने के बाद सालाना 40,000 करोड़ रुपए मिलेंगे लेकिन कलेक्शन ऐसा नहीं रहा।
कुल मिलाकर LTCG लगाने से सरकार की रेवेन्यू नहीं बनी लेकिन आलोचना का शिकार जरूर होना पड़ा। फिलहाल Foreign Portfolio Investors (FPIs) और दूसरे निवेशक पीएम मोदी के उस भाषण का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि इस पर दोबारा काम हो रहा है।
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