मोदी के गुजरात में स्किल इंडिया का हाल

बजट से पहले आवाज़ आपको दिखाने की कोशिश कर रहा है कि इंडिया में स्किल की कितनी कमी है।

अपडेटेड Feb 06, 2016 पर 4:37 PM
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सत्ता के शिखर से मेक इन इंडिया का आह्वान हो रहा है। लेकिन इसके लिए इंडिया में कुशल कामगार का होना जरूरी है। सो स्किल इंडिया का भी नारा गूंजा है। इस बजट से पहले आवाज़ आपको दिखाने की कोशिश कर रहा है कि इंडिया में स्किल की कितनी कमी है और उद्यमी इसके कारण कितने दबाव में हैं।

गुजरात के साणंद की फैक्ट्रियों में यूपी और बिहार के कारीगरों की भरमार है। आसपास कुशल कारीगर मिलते नहीं, सो मजबूरन फैक्ट्री मालिक दूसरे राज्यों से महंगी पगार पर कर्मचारी लाते हैं। पगार बढ़ती है तो कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन भी। जाहिर है मोटी पगार देकर हम चीन के सस्ते माल का मुकाबला नहीं कर सकते। उद्यमी बताते हैं कि देश में कुशल कारीगर पैदा करने वाले संस्थानों की कमी है।

गुजरात में 280 आईटीआई हैं और साणंद में महज दो। किसी आईटीआई से क्वालिटी ट्रेनिंग के बारे में पूछिए तो वो अपनी मजबूरी गिना देते हैं। स्किल डेवलपमेंट के मामले में महिलाएं और भी पीछे हैं। साणंद की ज्यादातर फैक्ट्रियों में महिला कामगारों की तादाद बेहद कम है। कई बार तो उद्यमियों को महिलाओं को नौकरी पर रखने के बाद ट्रेनिंग भी देनी पड़ती है। यानी एक बार फिर कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन बढ़ जाता है।

गुजरात सरकार भी इस बात को स्वीकारती है कि राज्य में टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीटूयूट्स की कमी है और सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है। सरकार हर तालुका में एक आईटीआई खोलने जा रही है। लेकिन उद्यमी बताते हैं कि इसका फायदा मिलने में कम से कम 5 साल लगेंगे। तो नारों में सही है लेकिन हकीकत में स्किल इंडिया अभी दूर की कौड़ी है। क्या इस आम बजट में इंडिया को ट्रेन करने की बात होगी?

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