निचोड़ का बजट

सालों से जोड़े हुए एम्प्लॉई प्रॉविडेंट फंड के पैसे निकालने पर कुल रकम के साठ फीसदी पर टैक्स देना होगा।

अपडेटेड Feb 29, 2016 पर 7:10 PM

प्रदीप पंड्या
बैंकिंग एडिटरः सीएनबीसी आवाज़

लिखने बैठा था बजट का निचोड़, लेकिन लिखने के बाद हेडिंग बदलनी पड़ी। बजट घाटे को काबू में रखने के लिए वित्त मंत्री कोई भी कीमत चुकाने को तैयार नजर आए। डिविडेंड से होने वाली आमदनी अगर दस लाख से ज्यादा हो तो 10 फीसदी टैक्स। इसको कहते हैं तिहरा कराधान, यानि ट्रिपल टैक्सेशन। ऐसे समझिए कि पहले कंपनी ने मुनाफे पर क़ॉरपोरेट टैक्स दिया, फिर डिविडेंड देने से पहले डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स दिया और आखिर में जो डिविडेंड हाथ मे आया उस पर भी टैक्स प्लस सर-चार्ज। जाने माने वरिष्ठ उद्योगपति आदि गोदरेज को गुज़रा ज़माना याद आ गया जब मैंने उनसे उनकी प्रतिक्रिया पूछी। लेकिन गोदरेज यह याद कराना नहीं भूले कि 70 के दशक में जब टैक्स रेट 70-80 फीसदी हुआ करता था, उन दिनों हमारी जीडीपी ग्रोथ भी 3 परसेंट हुआ करती थी। इशारा साफ है, जितना ज्यादा टैक्स उतनी कम ग्रोथ - 

वित्त मंत्री जी, सुनिए। किसी और की नहीं तो नीति आयोग के प्रमुख अरविंद पानगढ़िया की। जब पानगढ़िया जी से मैने पूछा कि कुछ देर के लिए एक अर्थशास्त्री बन कर सोचिए क्या ये सही है, तो उन्होंने भी माना कि इस तरह की कर व्यवस्था से ग्रोथ पर उल्टा असर पड़ता है।

डीजल कारों से प्रदूषण बढ़ता है या पेट्रोल से ये बहस तो चल ही रही थी लेकिन अब तो जेटली जी ने गैस से चलने वाली गाड़ियों पर भी टैक्स लगा दिया। अब केवल बैटरी से चलने वाली कारों को छोड़ कर हर गाड़ी महंगी हो जाएगी। सालों से टैक्स चोरी कर रहे लोगों को तो 45 फीसदी टैक्स भर कर ब्लैक का व्हाइट करने का मौका दे दिया। लेकिन सालों से जोड़े हुए एम्प्लॉई प्रॉविडेंट फंड के पैसे निकालने पर कुल रकम के साठ फीसदी पर टैक्से देना होगा। अब बताइए क्या निकाला आपने इस बजट का निचोड़?

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