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अंतरिम बजट से पहले क्या है, टैक्सपेयर की आस

उम्मीद है कि चुनावी बजट होने की वजह से सरकार टैक्सपेयर्स को लुभाने की कोशिश करेगी।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 29, 2019 पर 10:47 AM
अंतरिम बजट से पहले क्या है, टैक्सपेयर की आस

अंतरिम बजट से पहले क्या है, टैक्सपेयर की आस और लोगों को वित्त मंत्री पर कितना विश्वास है? जानने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ कर रहा है ये खास आयोजन, टैक्स घटाओ आंदोलन।

उम्मीद है कि चुनावी बजट होने की वजह से सरकार टैक्सपेयर्स को लुभाने की कोशिश करेगी। मिडिल क्लास को ज्यादा राहत देने की कोशिश होगी। सरकार के पास टैक्सपेयर्स को खुश करने का मौका है। टैक्सपेयर्स की मांग है कि एग्जम्प्शन लिमिट बढ़नी चाहिए। 4 साल से टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख बनी हुई है। अगर 8 लाख सालाना आमदनी वाले को 10 फीसदी का आरक्षण मिल सकता है तो आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये से ज्यादा होनी चाहिए। जानकारों का कहना है कि 4 सालों में टैक्सपेयर की आय में बढ़ोतरी हुई है। जीडीपी को ध्यान में रखकर एग्जम्प्शन लिमिट बढ़ानी चाहिए। आयकर छूट की सीमा 5 लाख रुपये तक होनी चाहिए।

सीनियर सिटीजंस का कहना है कि अभी सीनियर सिटीजन के लिए टैक्स छूट की सीमा 3 लाख रुपये है, इसे बढ़कर 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए। सुपर सीनियर सिटीजन के लिए 7 लाख रुपये तक टैक्स छूट होनी चाहिए। सीनियर सिटीजन सारी उम्र टैक्स चुकाता है। सीनियर सिटीजन को ज्यादा से ज्याद टैक्स छूट मिले। इलाज के खर्च पर ज्यादा रियायत मिलनी चाहिए। मेडिकल इंश्योरेंस पर टैक्स छूट सीमा बढ़ानी चाहिए। सेक्शन 80डी के तहत सीनियर सिटीजन को ज्यादा छूट मिलनी चाहिए। इलाज के खर्च के लिए 50000 रुपये तक की छूट बेहद कम है। कुल मेडिकल खर्चों पर टैक्स छूट मिलनी चाहिए।

बाजार के कारोबारियों की मांग है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से निजात मिलनी चाहिए। मार्च 2018 से सरकार ने एलटीसीजी टैक्स लगाया है। जिसके तहत शेयरों पर 1 लाख से ज्यादा की कमाई पर 10 फीसदी टैक्स लगता है। कारोबारियों की मांग है कि 10 फीसदी टैक्स के फैसले को हटाया जाना चाहिए। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए ये टैक्स हटाना चाहिए।

महिलाओं को उम्मीद हैं कि वित्त मंत्री देश की आधी आबादी का ध्यान रखेंगे। मैटरनिटी लीव के दौरान सैलरी टैक्स फ्री होनी चाहिए। महिलाओं को अतिरिक्त छूट मिलनी चाहिए। साल 2008 में अतिरिक्त छूट हटाई गई थी। महिलाओं के लिए अलग से टैक्स स्लैब होना चाहिए। कामकाजी महिलाओं पर ज्यादा जिम्मेदारी होती है। टैक्स के लिहाज से महिलाओं को ज्यादा फायदा मिलना चाहिए।

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