अभिषेक अनेजा
फाइनेंस बिल 2021 को आने में अब एक हफ्ते से भी कम का वक्त रह गया है। फाइनेंस बिल 1 फरवरी को संसद के पटल पर रखा जाएगा। ऐसे में टैक्सपेयर्स की उम्मीदें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के दौरान Covid-19 ने पूरे कारोबारी माहौल को बुरी तरह से झकझोर दिया था। इसकी वजह से कंपनियों को भारी नुकसान हुए। बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरियां गंवानी पड़ीं और ज्यादातर लोगों को अपनी सैलरी में कटौती का सामना करना पड़ा। इन सब वजहों से अर्थव्यवस्था एक बड़े स्लोडाउन के दौर में चली गई।
नौकरी करने वाले मिडल क्लास और SME सेक्टर को उम्मीद है कि इस साल उनके लिए कुछ राहतों का ऐलान किया जाएगा। आश्चर्यजनक तौर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी एक बयान में कहा है कि इस साल का बजट असाधारण होगा। इस बयान ने भी टैक्सपेयर्स की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं।
पिछले साल अर्थव्यवस्था को Covid-19 महामारी के बुरे प्रभावों से उबारने के लिए सरकार ने वक्त-वक्त पर कई किस्तों में राहत पैकेजों का ऐलान किया था। हालांकि, औपचारिक और अनौपचारिक सेक्टर को अभी भी Covid के पहले के स्तरों पर वापस लौटने में कुछ और महीनों का वक्त लगेगा।
Covid के बाद के दौर में वित्त मंत्री के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी अर्थव्यवस्था में खपत के स्तर को वापस लाना है। ऐसा तभी हो सकता है जबकि 80C के तहत टैक्सपेयर्स को निश्चित निवेश/खर्च पर मिलने वाले टैक्स फायदों को बढ़ाया जाए। इसके अलावा, रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए पुरानी और नई दोनों तरह की कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज पर टैक्स ब्रेक का विचार किया जाना चाहिए।
पिछले कुछ वर्षों में टैक्स सिस्टम की जटिलता लगातार बढ़ी है। GST का पालन करना पूरे बिजनेस सेक्टर के लिए एक टेढ़ी खीर साबित हुआ है। सरकार को इस मौके पर कंप्लायंस की व्यवस्था को आसान बनाने का काम करना चाहिए और मौजूदा टैक्स और कॉरपोरेट कानूनों में नई शर्तों और जरूरतों को थोपने से बचना चाहिए।
इनके अलावा, वित्त मंत्री का फोकस अर्थव्यवस्था में डाली जाने वाली पूंजी की मात्रा बढ़ाने पर होना चाहिए। इसके लिए खासतौर पर SME और MSME सेक्टर में नए निवेश को टैक्स ब्रेक देने पर विचार करना चाहिए।
इस वक्त यह भी अहम है कि टैक्सपेयर्स और खासतौर पर सैलरीड क्लास पर करों का अतिरिक्त बोझ न डाला जाए। टैक्सेशन के लिए ऑल्टरनेट स्कीम (बिना डिडक्शंस के साथ) पिछले साल ऑफर की गई थी। इस स्कीम में संशोधन किए जाने चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा सैलरीड टैक्सपेयर्स इसमें शामिल हो सकें क्योंकि एक बड़े तबके ने इस स्कीम में खुद को शामिल नहीं किया है।
सरकार ने हाल में ही Covid-19 का वैक्सीनेशन प्रोग्राम बड़े पैमाने पर लॉन्च किया है और ऐसे में यह देखना खास होगा कि क्या टैक्सपेयर्स को भी इस बजट में कोई राहत की वैक्सीन मिलती है या नहीं?
(लेखक CA हैं)
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